जमशेदपुर। बांग्ला नव वर्ष (पोइला बैसाख) के शुभ अवसर पर परसुडीह के हलुदबनी में सुर, ताल और नृत्य का एक अनूठा संगम देखने को मिला। जमशेदपुर म्यूजिक सर्किल की वरिष्ठ और प्रख्यात शास्त्रीय गायिका विदूषी नुपुर गोस्वामी की ओर से हलुदबनी स्थित उनके संगीत प्रशिक्षण केन्द्र में सोमवार संध्या 6 बजे एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस सांगीतिक महफिल में शहर के कई प्रख्यात कलाकारों और उभरते हुए विद्यार्थियों ने अपनी उत्कृष्ट कला का प्रदर्शन कर वहां मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
माता विदूषी संध्यारानी गोस्वामी को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम का शुभारंभ एक बेहद आध्यात्मिक और सम्मानजनक तरीके से हुआ। उपस्थित कलाकारों और अतिथियों ने सबसे पहले संस्था की प्रेरणास्रोत माता विदूषी संध्यारानी गोस्वामी जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके पश्चात संगीत साधना से जुड़े विद्यार्थियों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को आगे बढ़ाया और नव वर्ष के उल्लास को सुरों में पिरोकर पेश किया।
जूनियर और सीनियर विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियां
सांस्कृतिक संध्या में संस्था के शिक्षार्थियों ने अपनी शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय गायकी से सभी का दिल जीत लिया। विद्यार्थियों ने खयाल, रबीन्द्र संगीत, नजरुल गीत, सुमधुर भजन और आकर्षक नृत्य पेश किए।
जूनियर ग्रुप: विदिशा गुप्ता, प्रिंकेश घंटी, कृष्णेंदु मंडल, सायनदीप बनर्जी, अमृता भट्टाचार्य, ऋद्धि और अन्वेषा घंटी ने अपने सुरीले गायन से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
सीनियर ग्रुप: स्वयं मिश्रा, संदीप्ता चक्रवर्ती, आयुष्मान कुमार, सौम्यी दास शर्मा, अपर्णा, रूपम मण्डल, नंदिता दत्ता, नेहा पाल, अर्चना गोस्वामी और गायक राजेन्द्र राज ने अपनी परिपक्व गायकी का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। इन सभी उभरते हुए कलाकारों के साथ तबले पर शुभ्र शेखर मुखर्जी ने बेहद सटीक और शानदार संगत की।
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अतिथि कलाकारों की ग़ज़ल और भजनों ने बांधा समां
इस विशेष अवसर पर शहर के प्रख्यात अतिथि कलाकारों ने भी महफिल की रौनक बढ़ाई। जाने-माने गायक अनिल सिंह, मनमोहन सिंह और डालिया भट्टाचार्य ने सुगम संगीत की ऐसी स्वर लहरियां छेड़ीं कि दर्शक मंत्रमुग्ध रह गए। इन दिग्गज कलाकारों ने एक से बढ़कर एक भावपूर्ण भजन और रूहानी ग़ज़लें गाकर उपस्थित श्रोताओं का मन मोह लिया और माहौल को संगीतमय बना दिया।
सितार की तान और राग मारु बिहाग से हुआ समापन
कार्यक्रम के अंतिम और सबसे आकर्षक चरण में प्रख्यात सितार वादक सुभाष बोस ने अपनी जादुई उंगलियों से सुरों की गंगा बहा दी। उन्होंने राग ‘मारु बिहाग’ में आलाप, जोड़ और फिर तीन ताल व एकताल में कई खूबसूरत बंदिशें पेश कीं। उनके सुरीले और शास्त्रीय वादन से वहां उपस्थित कलाप्रेमी काफी प्रफुल्लित हुए। उनके इस सितार वादन में तबले पर स्वरूप मोइत्रा ने अत्यंत सराहनीय और तालबद्ध संगत की। सुरों से सजी इस शानदार सांस्कृतिक संध्या का समापन बंशीधर गोस्वामी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।






