

जमशेदपुर।

शहर के धार्मिक और आध्यात्मिक मानचित्र पर एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। जमशेदपुर के मैरिन ड्राइव क्षेत्र में पुरी की तर्ज पर श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक केंद्र (Shri Jagannath Spiritual Center) का निर्माण प्रस्तावित है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 25 या 26 फरवरी को रखे जाने की संभावना है।
हालांकि, राष्ट्रपति के इस प्रस्तावित जमशेदपुर दौरे को लेकर अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू होने की चर्चा है, लेकिन अंतिम कार्यक्रम की पुष्टि संबंधित अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगी।
मंदिर के साथ बनेगा संपूर्ण आध्यात्मिक कॉम्प्लेक्स
इस परियोजना में केवल भव्य मंदिर ही नहीं, बल्कि एक स्पिरिचुअल कॉम्प्लेक्स, ध्यान एवं साधना केंद्र, सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आधुनिक सभागार तथा श्रद्धालुओं की सुविधाओं से जुड़े अन्य ढांचे भी शामिल होंगे। यह संपूर्ण परिसर धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगा।
पत्थर से बनेगा मंदिर, पुरी शैली की झलक
परियोजना से जुड़े पदाधिकारियों के अनुसार मंदिर का निर्माण पूरी तरह पत्थर से किया जाएगा और इसकी वास्तुकला में पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर की परंपरागत शैली की झलक देखने को मिलेगी। यह मंदिर आने वाले समय में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।
सौ करोड़ रुपये की लागत, 2.8 एकड़ में होगा विकास
जानकारी के अनुसार यह एक ₹100 करोड़ की मेगा परियोजना होगी। इसके लिए प्रारंभिक रूप से ढाई एकड़ भूमि चिन्हित की गई है, जबकि रिवेन्यू भूमि को जोड़ने के बाद इसका कुल क्षेत्रफल 2.8 एकड़ तक होने की संभावना है। भविष्य में यह केंद्र जमशेदपुर का प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल बन सकता है।
उत्कल एसोसिएशन की अहम भूमिका
इस परियोजना के क्रियान्वयन में उत्कल एसोसिएशन, जमशेदपुर की प्रमुख भूमिका रही है। एसोसिएशन लंबे समय से इस दिशा में प्रयासरत था। उल्लेखनीय है कि जब द्रौपदी मुर्मू झारखंड की राज्यपाल थीं, तब उत्कल एसोसिएशन ने उन्हें ज्ञापन सौंपकर जमशेदपुर में पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ मंदिर के लिए भूमि उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था।
जमशेदपुर को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान
श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक केंद्र के निर्माण से जमशेदपुर को राष्ट्रीय धार्मिक मानचित्र पर एक नई पहचान मिलेगी। राष्ट्रपति के आगमन को लेकर प्रशासन और आयोजन समिति द्वारा तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आधिकारिक कार्यक्रम की घोषणा शीघ्र होने की संभावना है।
यह परियोजना न केवल आस्था का प्रतीक बनेगी, बल्कि शहर के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास में भी एक नया आयाम जोड़ेगी।


