जमशेदपुर।
लौहनगरी में लोक संस्कृति और परंपराओं की छटा एक बार फिर देखने को मिली। जिला भोजपुरी साहित्य परिषद एवं संपूर्ण भोजपुरी विकास मंच के संयुक्त तत्वावधान में भोजपुरी समाज का महान लोक पर्व ‘सत्तुवान’ बेहद हर्षोल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर समाज के लोगों ने भारी संख्या में जुटकर सामूहिक रूप से सत्तू और पारंपरिक व्यंजनों का सेवन किया और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत किया। यह आयोजन न केवल पुरानी परंपराओं को सहेजने का एक बेहतरीन प्रयास था, बल्कि समाज में एकजुटता, समरसता और प्रेम का संदेश भी दे रहा था।
सत्तू, आम की चटनी और गुड़ का हुआ सामूहिक भोज
सत्तुवान पर्व के इस विशेष आयोजन में पारंपरिक खान-पान का विशेष आकर्षण रहा। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी लोगों ने एक साथ बैठकर चना, मकई और जौ का सत्तू ग्रहण किया। इस सत्तू के स्वाद को दोगुना करने के लिए आम के टिकोरे (कच्चे आम) की चटनी, धनिया पत्ती और पुदीना की तीखी चटनी, आम का स्वादिष्ट अचार, देसी गुड़, प्याज, हरी मिर्च और नींबू का भी सामूहिक रूप से आनंद लिया गया। सत्तू खाने की यह सामूहिक परंपरा लोगों के बीच आपसी भाईचारे और सौहार्द को सीधे तौर पर बढ़ावा देती है।
क्या है सत्तुवान का महत्व और इसकी धार्मिक मान्यता?
भोजपुरी भाषियों ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सत्तुवान पर्व के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने बताया कि सत्तुवान दरअसल भोजपुरी संस्कृति का एक महत्वपूर्ण ‘काल बोधक’ पर्व है। हिंदू पंचांग और सौर मास की गणना के अनुसार, जब सूर्य देव राशि परिवर्तन करते हैं (कर्क रेखा से दक्षिण की ओर प्रस्थान), तब यह महान पर्व मनाया जाता है।
परंपराओं के अनुसार, आज के दिन नदियों या पवित्र सरोवरों में स्नान करने का विशेष महत्व माना गया है। स्नान और पूजा-पाठ के बाद नए अन्न (जौ के सत्तू), कच्चे आम के टिकोरे और गुड़ का दान गरीब और असहाय लोगों के बीच किया जाता है। इसके साथ ही, अपने ईष्ट देवता और ब्रह्म बाबा को इन नई फसलों का भोग लगाकर इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की सदियों पुरानी मान्यता है।
सामाजिक सद्भाव और उल्लास का प्रतीक है यह पर्व
इस भव्य कार्यक्रम की अध्यक्षता सिंहभूम जिला भोजपुरी साहित्य परिषद के अध्यक्ष और वरिष्ठ साहित्यकार अरबिंद विद्रोही ने की। उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सत्तुवान सिर्फ एक खान-पान का त्योहार नहीं है, बल्कि यह संस्कृति के प्रति सचेतना जगाने का एक महान पर्व है। यह मानव जीवन में नया उल्लास भरता है और समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को नई मजबूती प्रदान करता है।
कार्यक्रम में इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
सत्तुवानी पर्व के इस भव्य आयोजन में भोजपुरी भाषी समाज की भारी भीड़ उमड़ी। इस अवसर पर संपूर्ण भोजपुरी विकास मंच के महामंत्री प्रदीप सिंह भोजपुरिया, यमुना तिवारी हर्षित, मुस्कान के अध्यक्ष सह टीएसपीडीएल के सहसचिव शशि भूषण मिश्रा, कौशलेश कुमार, मसूद खान, उदय प्रताप हयात, मुन्ना चौबे, राजेश पांडेय, राजेश भोजपुरिया, अजय किशोर चौबे, जगदीश मिश्रा, विजय किशोर चौबे, रंजन दुबे, राजेश राय, राम बिनोद सिंह, कैलाश सिंह, राजेश देशप्रेमी, बलविंदर सिंह, अनिल गिरी, जितेश तिवारी, बिमल कुमार बिमल, रमेश हंसमुख और श्याम सुंदर पांडेय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।





