
जमशेदपुर.


टाटा स्टील के वरिष्ठ पूर्व पदाधिकारी, समाजसेवी एवं लायंस क्लब के सक्रिय सदस्य डॉ. बी.के. श्रीवास्तव के निधन से शहर के सामाजिक एवं बौद्धिक जगत में शोक की लहर व्याप्त है. 11 जून को उन्होंने अंतिम सांस ली. वे 87 वर्ष के थे. पिछले छह महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे.
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टाटा स्टील में समर्पण के साथ दीं अपनी सेवाएं
वर्ष 1939 में जन्मे डॉ. श्रीवास्तव ने टाटा स्टील में अत्यंत कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अपनी सेवाएँ दीं. सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने स्वयं को समाज सेवा के कार्यों में सक्रिय रखा और लायंस क्लब के माध्यम से अनेक जनकल्याणकारी गतिविधियों से जुड़े रहे. उनके सौम्य व्यक्तित्व, अनुशासित जीवनशैली तथा सेवा-भाव ने समाज में उन्हें विशेष सम्मान दिलाया.
परिजनों, शुभचिन्तकों व शहरवासियों के बीच शोक की लहर
वे अपने पीछे एक प्रतिष्ठित एवं सुसंस्कृत परिवार छोड़ गए हैं. उनकी धर्मपत्नी डॉ. आशा श्रीवास्तव जानी-मानी साहित्यकार हैं. उनके सुपुत्र प्रो. आकाश दीप श्रीवास्तव हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं, जबकि सुपुत्री श्रीमयी (श्रीमी) बेंगलुरु में कार्यरत हैं.
डॉ. बी.के. श्रीवास्तव का जीवन कर्म, सेवा और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण रहा. उनके निधन से न केवल उनके परिवार, बल्कि सामाजिक जगत को भी अपूरणीय क्षति पहुँची है.
बहुभाषीय साहित्यिक संस्था सहयोग तथा लायन्स क्लब ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोकाकुल परिवार को यह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है.


