
जमशेदपुर।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर के धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग ने 18 मई 2026 को संस्थान के DJLHC में ‘पदार्थ प्रसंस्करण एवं कैरेक्टराइजेशन में नवीन प्रगति’ (RAMPC 2026) विषय पर द्वितीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भव्य आयोजन किया। यह सम्मेलन शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों और विद्यार्थियों के लिए एक बेहतरीन मंच साबित हुआ, जहां उन्नत सामग्री, सतत प्रौद्योगिकी और इंजीनियरिंग के उभरते अनुप्रयोगों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
तकनीकी विकास और सतत सामग्री की आवश्यकता पर जोर
सम्मेलन का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। प्रोफेसर रामकृष्ण ने अतिथियों का स्वागत करते हुए इसे शोधकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण सहयोगात्मक मंच बताया। कार्यक्रम के दौरान विभागाध्यक्ष ने पदार्थ विज्ञान में अंतःविषयक (Interdisciplinary) शोध के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। रजिस्ट्रार और उपनिदेशक ने जलवायु परिवर्तन के दौर में ऊर्जा स्थिरता और भविष्य के लिए पर्यावरण के अनुकूल (बायो-डिग्रेडेबल) सामग्रियों के विकास को समय की सबसे बड़ी मांग बताया। मुख्य अतिथि ने सेमीकंडक्टर तकनीक और उन्नत सामग्रियों के औद्योगिक उपयोग पर विस्तार से अपनी बात रखी। उद्घाटन सत्र का समापन सम्मेलन के संयोजक प्रोफेसर प्रकाश सरकार के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
उच्च तापमान वाले सिरेमिक्स और सॉलिड स्टेट वेल्डिंग पर चर्चा
तकनीकी सत्रों में विख्यात विशेषज्ञों ने अपने शोध प्रस्तुत किए। प्रोफेसर राहुल मित्रा ने अत्यधिक उच्च तापमान पर काम करने वाले सिरेमिक कम्पोजिट्स (जैसे ज़िरकोनियम डाइबोराइड- ZrB₂ और हैफ्नियम डाइबोराइड- HfB₂) के एयरोस्पेस और औद्योगिक उपयोग पर अहम जानकारी दी। उन्होंने गैस टरबाइन में इसके उपयोग के फायदों को विस्तार से समझाया। वहीं, डॉ. मधुमंती भट्टाचार्य ने ‘सॉलिड स्टेट वेल्डिंग’ के जरिए सतत निर्माण और मरम्मत तकनीकों पर प्रकाश डाला। उन्होंने फ्रिक्शन स्टिर वेल्डिंग (FSW) को ऊर्जा बचाने और प्रदूषण कम करने वाली एक बेहतरीन और पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रिया बताया, जो भविष्य के निर्माण कार्यों में मील का पत्थर साबित होगी।
नैनोइंडेंटेशन की सटीकता के लिए नई पद्धति पेश
सम्मेलन के एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र में प्रोफेसर संध्या वर्मा ने यांत्रिक गुणों के सटीक मापन और नैनोइंडेंटेशन तकनीकों पर अपना शोध प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रयोगों के दौरान आने वाली ‘थर्मल ड्रिफ्ट’ की चुनौतियों को दूर करने के लिए “प्रायर ड्रिफ्ट मॉनिटरिंग (PDM)” नामक एक नई और कारगर पद्धति पेश की। यह तकनीक सूक्ष्म-यांत्रिक विश्लेषण में अत्यंत उपयोगी साबित होगी। तकनीकी सत्रों के समापन पर विभागाध्यक्ष और प्रोफेसर मोनालिसा मंडल द्वारा सभी मुख्य वक्ताओं को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
अनुसंधान और नवाचार को मिला नया आयाम
RAMPC 2026 अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन एक बेहद सकारात्मक संदेश के साथ हुआ। इस सफल आयोजन ने न केवल आधुनिक शोध और तकनीकी विकास को साझा करने का मंच दिया, बल्कि भविष्य की औद्योगिक और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए नए दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किए। इस कार्यक्रम ने इंजीनियरिंग के छात्रों और शोधकर्ताओं को नवाचार के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा दी है।


