
जमशेदपुर। बर्मामाइंस क्षेत्र के लोग लंबे समय से धूल प्रदूषण, लगातार लगने वाले सड़क जाम और बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं से परेशान हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन मूलभूत समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने के बजाय संबंधित प्रबंधन और प्रशासनिक तंत्र जनता की परेशानी को नजरअंदाज कर रहा है। इसी बीच दुर्गा पूजा मैदान में भारी वाहनों की पार्किंग बनाने के प्रयास ने लोगों के आक्रोश को और भड़का दिया है।


दुर्गा पूजा मैदान में पार्किंग के प्रयास का विरोध
स्थानीय लोगों के अनुसार, बर्मामाइंस दुर्गा पूजा मैदान क्षेत्र की सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है। बावजूद इसके, यहां भारी वाहनों की पार्किंग बनाने की कोशिश की जा रही है। रविवार को एक बार फिर कुछ पदाधिकारियों और उनके साथ आए कथित असामाजिक तत्वों द्वारा मैदान में बड़ी गाड़ियों को खड़ा करने का प्रयास किया गया, जिसे देखकर स्थानीय निवासी भड़क उठे।
बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने संभाला मोर्चा
इस प्रयास के खिलाफ बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के सदस्यों और स्थानीय नागरिकों ने मौके पर ही जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मैदान में वाहनों को खड़ा करने से रोकते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि दुर्गा पूजा मैदान को किसी भी हालत में व्यावसायिक पार्किंग स्थल नहीं बनने दिया जाएगा। विरोध के दौरान पूरे क्षेत्र में नारेबाजी हुई और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
सैकड़ों बस्तीवासी उतरे सड़क पर
विरोध प्रदर्शन में रामबाबू तिवारी, सतबीर सिंह, रितेश झा, दीपक झा, शशि सिंह, सौरव श्रीवास्तव, भोला सिंह, अनिल सिंह, गुड्डू सिंह समेत सैकड़ों की संख्या में बस्तीवासी शामिल हुए। लोगों ने एकजुट होकर यह संदेश दिया कि क्षेत्र की समस्याओं को नजरअंदाज करना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मूल समस्याओं पर ध्यान देने की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बर्मामाइंस पहले से ही धूल प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रहा है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही के कारण आए दिन सड़क जाम और दुर्घटनाएं हो रही हैं। ऐसे में पार्किंग बनाए जाने से स्थिति और भयावह हो सकती है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि धूल प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और सड़क सुरक्षा जैसी मूलभूत समस्याओं पर तुरंत ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। लोगों का कहना है कि यह संघर्ष केवल एक मैदान का नहीं, बल्कि पूरे बर्मामाइंस क्षेत्र की सुरक्षा और पहचान से जुड़ा है।


