जमशेदपुर, 30 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) जमशेदपुर में शुक्रवार को पांच दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला SIMPLE 2026 – Structural Integrity Management and Protocols for Life Extension का शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला में देश के प्रमुख वैज्ञानिक, शिक्षाविद और उद्योग विशेषज्ञ औद्योगिक मशीनों तथा संरचनाओं की सुरक्षा, विश्वसनीयता और सेवा अवधि बढ़ाने वाली आधुनिक तकनीकों पर मंथन करेंगे।
एनआईटी जमशेदपुर के धातुकर्म एवं पदार्थ अभियांत्रिकी विभाग की ओर से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (IIM), जमशेदपुर चैप्टर के सहयोग से आयोजित यह कार्यशाला 3 नवंबर तक चलेगी। इसका आयोजन संस्थान के डायमंड जुबली लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स में किया जा रहा है।
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औद्योगिक मशीनों की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक परीक्षण जरूरी: डॉ. मोहंती
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि डॉ. ओंकार नाथ मोहंती ने Integrity of Engineering Components – View from a Window विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने कहा कि आधुनिक उद्योगों में मशीनों और संरचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धातुओं के व्यवहार, आंतरिक तनाव और संभावित विफलताओं का वैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक है।
उन्होंने अवशिष्ट तनाव (Residual Stress) और बार-बार पड़ने वाले भार से धातुओं में होने वाली थकानजनित विफलता (Fatigue Failure) के कारणों पर विस्तार से चर्चा की।
XRD, अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग और शॉट पीनिंग तकनीक पर चर्चा
डॉ. मोहंती ने एक्स-रे विवर्तन (XRD), अल्ट्रासोनिक परीक्षण, होल-ड्रिलिंग और मैग्नेटिक बार्कहाउज़ेन नॉइज़ जैसी आधुनिक परीक्षण विधियों की उपयोगिता बताई।
उन्होंने कहा कि इन तकनीकों से औद्योगिक उपकरणों में मौजूद तनाव और संभावित खराबी का आकलन करने में मदद मिलती है।
इसके अलावा शॉट पीनिंग जैसी सतह उपचार तकनीक के माध्यम से उपकरणों की थकान प्रतिरोधक क्षमता और सेवा अवधि बढ़ाने के उपायों पर भी प्रकाश डाला।
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AI और डिजिटल ट्विन से औद्योगिक उपकरणों की निगरानी पर फोकस
पांच दिवसीय कार्यशाला में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, डिजिटल ट्विन, कंप्यूटर सिमुलेशन और गैर-विनाशकारी परीक्षण (NDT) जैसे विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे।
विशेषज्ञ औद्योगिक उपकरणों में खराबी की पहचान, क्षति के वैज्ञानिक मूल्यांकन और उनकी शेष उपयोगी आयु का अनुमान लगाने में इन तकनीकों की भूमिका समझाएंगे।
इसके साथ ही औद्योगिक विफलताओं के वास्तविक उदाहरणों, धातुओं में क्षरण, सूक्ष्म संरचनात्मक अध्ययन और औद्योगिक मानकों पर भी चर्चा होगी।
टाटा स्टील, CSIR-NML और DMRL के विशेषज्ञ होंगे शामिल
कार्यशाला के आगामी सत्रों में टाटा स्टील, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (CSIR-NML), रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला (DMRL), हैदराबाद और एनआईटी जमशेदपुर के विशेषज्ञ तकनीकी अनुभव साझा करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा अनुसंधान को वास्तविक औद्योगिक जरूरतों से जोड़ना है।
निदेशक गौतम सूत्रधार के मुख्य संरक्षण में आयोजन
कार्यशाला का आयोजन एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के मुख्य संरक्षण, प्रो. अशोक कुमार के संरक्षण और डॉ. सी. एस. चौधरी की अध्यक्षता में किया जा रहा है।
डॉ. प्रकाश सरकार और डॉ. मोनालिसा मंडल कार्यशाला के संयोजक हैं, जबकि डॉ. राम कृष्ण और डॉ. अरविंद गली आयोजन सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
कार्यक्रम को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स, जमशेदपुर चैप्टर और जैन साइंटिफिक सॉल्यूशंस का सहयोग प्राप्त है।
कार्यशाला का समापन 3 नवंबर को तकनीकी सत्रों, प्रायोजकों की प्रस्तुतियों और समापन समारोह के साथ होगा।

