
ख़त के पन्नों पर जब तारीख न दिखे
समझना मुहब्बत इबादत बन गई है–निनाद की पहली काव्य संध्या “मनस्वर” में गूंजी कविताएं और शायरी
जमशेदपुर,
मुहब्बत ठहरने लगी है ऐसे मुकाम पर
मंजिलों से ज्यादा रास्ते तड़पाने लगे हैं
ख़त के पन्नों पर जब तारीख न दिखे
समझना मुहब्बत इबादत बन गई है
—-कुणाल षाड़ंगी
उपरोक्त स्वरचित शायरी जब मुख्य अतिथि पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी ने सुनाई तो तुलसी भवन का चित्रकूट कक्ष तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा..मौका था,शहर के उत्साही व उभरते कवि निशांत सिंह व पूनम महानंद के नेतृत्व में ‘निनाद’ की ओर से आयोजित पहली काव्य संध्या का जिसमें 12युवा कवियों ने अपनी कविताओं,गीतों और शायरी से सबको मंत्रमुग्ध कर दिया.इस माहौल में मुख्य अतिथि कुणाल षाड़ंगी भी खुद को रोक नहीं पाए और स्वरचित दो शायरियां सुनाई.
निनाद द्वारा आयोजित इस पहली काव्य संध्या में शहर की युवा प्रतिभाओं ने भावों की ऐसी सरिता बहाई कि उपस्थित जनसमूह उस प्रवाह में बहने लगा और कुछ समय के लिए खो गया.
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि कुणाल षाड़ंगी, विशिष्ट अतिथि डॉ. प्रसेनजित तिवारी और दिव्येन्दु त्रिपाठी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन के साथ किया. पूनम महानन्द ने भावपूर्ण संचालन किया, जबकि स्वागत भाषण संस्था के सह-संस्थापक निशांत सिंह ने प्रस्तुत किया.
इस अवसर पर मंच से प्रसव पीड़ा, स्त्री की दुर्दशा, ईश्वर, भारत, और अनजान मुसाफिर जैसे विषयों पर सशक्त और विचारोत्तेजक कविताएं प्रस्तुत की गईं.
चंद्र मोहन सोरेन, जय शाही, क्षमाश्री, शुभम पांडेय, तस्लीम, पूजा कुमारी, मनीष कुमार, आरती, ह्दयांश, वीणा, विद्या, और सुनील जैसे उभरते कवियों ने श्रोताओं को विविध भावनाओं की यात्रा पर ले जाते हुए अपने शब्दों से बाँध लिया.
प्रमुख रचनाएँ और झलकियाँ:
“मोहन का बांसुरी वादन…” –
“इश्क कोई जंग नहीं…” – तस्लीम (उर्दू)
“द्रौपदी” – शुभम पांडेय
चीर हरण का दंश झेलती
गली गली पांचालीबात जो कहने जा रहा हूं
वह नई नहीं पुरानी है
सतयुग द्वापर त्रेता की
दुहराई हुई कहानी है
उस युग में भी लुटी थी नारी
आज भी लूटी जा रही है“अनजान मुसाफिर” – निशांत सिंह
साहित्य प्रेमियों की भीड़ और उनके उत्साह से अभिभूत अतिथियों ने निनाद को उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं और इस प्रयास को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया.
कार्यक्रम के आयोजक निशांत सिंह ने कहा कि निनाद एक ऐसा मंच है जिसके माध्यम बेझिझक युवा अपनी रचनाएं न सिर्फ साझा करेंगे बल्कि आनेवाले समय में यह शहर की काव्य संस्कृति में चार चांद लगाएंगे.
कार्यक्रम में डाॅ रागिनी भूषण खास तौर पर उपस्थित हुईं.कक्ष में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद थे.



