
जमशेदपुर: नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग एंड एडमिनिस्ट्रेशन (NIEPA), नई दिल्ली और सीड्स संस्था के संयुक्त प्रयास से एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन XLRI – Xavier School of Management के फादर प्रभु सभागार में किया गया। सेमिनार का विषय था, “राष्ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में उच्च प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा प्रणाली में जीवन कौशल लागू करने में समस्याएं और चुनौतियां।”
कार्यक्रम में शिक्षाविद और एक्सएलआरआई फैकल्टी इन ऑर्गेनाइजेशनल बिहेवियर डॉ. निधि मिश्रा, डॉ. शुक्ला मोहंती (पूर्व वीसी, कोल्हान विश्वविद्यालय) और सीड्स संस्था की सचिव डॉ. शुभ्रा दिवेदी ने जीवन कौशल शिक्षा की महत्ता पर प्रकाश डाला और अपने अनुभव साझा किए।
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शिक्षा में जीवन कौशल की अहमियत
डॉ. निधि मिश्रा ने कहा कि आज लोग शैक्षणिक उत्कृष्टता (Academic Excellence) पर अधिक जोर दे रहे हैं, जबकि जीवन कौशल (Life Skills) को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बच्चों को केवल अकादमिक सफलता तक सीमित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सामाजिक, भावनात्मक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने के लिए जीवन कौशल शिक्षा अनिवार्य है।
डॉ. शुक्ला मोहंती ने सरकारी और ग्रामीण स्कूलों में जीवन कौशल पर और अधिक काम करने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी जीवन कौशल के महत्व के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
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प्रतिभागियों ने भी साझा किए विचार
कार्यक्रम में PM Shri Plus-2 High School, सिमुलडांगा के शिक्षक उमा नाथ सिंह ने कहा कि “जीवन को जीने का कौशल ही असली सफलता है।”
इस सेमिनार में सीड्स संस्था की महिला लीडर्स, बीइओ, हेडमास्टर, टीचर्स, पंचायत प्रतिनिधि, एसएमसी सदस्य, अभिभावक और 13 स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हुए।
प्रश्नोत्तर सत्र और धन्यवाद ज्ञापन
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों के लिए प्रश्नोत्तर सत्र रखा गया, जिसमें उपस्थित सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। अंत में सीड्स संस्था के प्रोग्राम संयोजक महानंद झा ने धन्यवाद ज्ञापन कर कार्यक्रम की सफलता की जानकारी दी।
इस सेमिनार ने बच्चों और शिक्षकों को जीवन कौशल की महत्वता से अवगत कराते हुए शिक्षा प्रणाली में इसके प्रभावी समावेशन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया।



