जमशेदपुर, । आज के आधुनिक और तेजी से बदलते परिवेश में इंसानी रिश्तों के मायने लगातार बदल रहे हैं। ऐसे में रिश्तों की जटिलताओं को समझने और उन्हें सही दिशा देने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसी ज्वलंत विषय पर केंद्रित चर्चित पुस्तक “Living in Relationship” को लेकर जमशेदपुर में एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर लेखिका त्रिपुरा झा ने अपनी यह बहुचर्चित पुस्तक राज्यसभा के पूर्व सांसद एवं प्रख्यात शिक्षाविद् राकेश सिन्हा को भेंट की। इस दौरान साहित्य, समाज और वर्तमान पीढ़ी के रिश्तों पर गहन और सार्थक संवाद देखने को मिला।
युवाओं के लिए एक सटीक मार्गदर्शक
पुस्तक का बारीकी से अवलोकन करने के बाद राकेश सिन्हा ने इसकी विषयवस्तु की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि आज के भागदौड़ भरे और अत्यधिक महत्वाकांक्षी युग में युवा अक्सर अपने करियर और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन खो बैठते हैं। ऐसे में यह पुस्तक आज की युवा पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक के रूप में कार्य करेगी। यह न केवल उन्हें रिश्तों की वास्तविक समझ प्रदान करती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि आधुनिक जीवनशैली के दबावों के बीच भावनात्मक संतुलन कैसे बनाए रखा जाए। यह किताब ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ जैसे समकालीन और संवेदनशील विषयों पर समाज को एक नई और परिपक्व दृष्टि देती है।
संसद के पुस्तकालय तक पहुँचाने का प्रयास
इस कृति की सामाजिक प्रासंगिकता और गहराई को देखते हुए राकेश सिन्हा ने एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने इस पुस्तक की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि वे इसे भारत की संसद के प्रतिष्ठित पुस्तकालय में रखवाने का पूरा प्रयास करेंगे। उनका मानना है कि इस तरह के गंभीर और समाजोपयोगी साहित्य की पहुँच केवल आम पाठकों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि देश के नीति-निर्माताओं और शीर्ष विचारकों तक भी होनी चाहिए। उन्होंने इच्छा व्यक्त की कि समाज का हर वर्ग इस पुस्तक को पढ़े और इससे लाभान्वित हो।
साहित्य और समाज का सार्थक संवाद
यह गरिमामय कार्यक्रम केवल एक पुस्तक भेंट करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह साहित्य और समाज के बीच एक सेतु बन गया। आधुनिक युग में रिश्तों की बदलती गतिशीलता, ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ की बढ़ती स्वीकार्यता, उसके मनोवैज्ञानिक प्रभाव और सामाजिक चुनौतियों पर इस दौरान विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों ने माना कि रिश्तों की इस नई परिभाषा को नकारने के बजाय, उसे समझने और उसमें सामंजस्य बिठाने की जरूरत है, जिसे त्रिपुरा झा ने अपनी लेखनी के माध्यम से बखूबी अंजाम दिया है।
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लेखिका के प्रयास को मिलीं ढेरों शुभकामनाएँ
कार्यक्रम के अंत में राकेश सिन्हा ने इस साहसिक और अत्यंत आवश्यक विषय पर उत्कृष्ट लेखन के लिए त्रिपुरा झा को अपनी ओर से हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे विषयों पर निष्पक्ष और तार्किक रूप से लिखना आसान नहीं है, लेकिन लेखिका ने अपनी गहरी समझ और शोध के जरिए इसे संभव बनाया है। निश्चित ही यह पुस्तक आने वाले समय में रिश्तों के मनोविज्ञान को समझने के लिए एक मानक ग्रंथ साबित होगी।






