
जमशेदपुर।
भारत की प्राचीन भाषाओं में से एक मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने पर मिथिला और मैथिली भाषी समाज ने भारत सरकार एवं महामहिम राष्ट्रपति के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। इस संबंध में मिथिला सांस्कृतिक परिषद, जमशेदपुर की ओर से एक औपचारिक आभार वक्तव्य जारी किया गया।

सिंहभूम में 3 लाख, झारखंड में 16 लाख मैथिली भाषी
परिषद ने अपने वक्तव्य में बताया कि सिंहभूम क्षेत्र में लगभग 3 लाख तथा पूरे झारखंड में करीब 16 लाख मैथिली भाषी निवास करते हैं। वर्ष 2003 में मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कर केंद्र सरकार ने मिथिला की सांस्कृतिक, भाषाई और साहित्यिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्रदान किया।
परिषद ने इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एवं उनकी सरकार के प्रति विशेष कृतज्ञता प्रकट की। वक्तव्य में कहा गया कि उन्होंने कवि कोकिल महाकवि विद्यापति की भाषा को वह सम्मान दिया, जिसकी वह सदियों से अधिकारी रही है।
समृद्ध साहित्यिक परंपरा की वाहक मैथिली
परिषद ने कहा कि मैथिली उत्तर-पूर्वी भारत की अग्रणी भाषाओं में से एक है, जिसमें 1500 वर्षों से अधिक पुरानी साहित्यिक परंपरा विद्यमान है। यह भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि महाकवि विद्यापति, राजा सलहेश, लोकदेव लोरिक, दीना-भदरी और परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी जैसी महान परंपराओं की सशक्त वाहक रही है। भारतीय भाषाओं के साहित्यिक परिदृश्य में मैथिली का स्थान विशिष्ट और गौरवपूर्ण रहा है।
राम मंदिर और पुनौरा धाम को बताया सम्मान का प्रतीक
परिषद ने वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा अयोध्या राम मंदिर के भव्य निर्माण तथा जगत जननी जानकी के प्राकट्य स्थल पुनौरा धाम में मंदिर शिलान्यास को भी मिथिला की संस्कृति, भाषा और सनातन परंपरा के सम्मान से जोड़ते हुए संतोष और आभार व्यक्त किया।
मैथिली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने की मांग
मिथिला और मैथिली भाषी समाज ने सरकार से अपेक्षा की है कि मैथिली को उसकी प्राचीनता, समृद्ध साहित्य और सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए ‘शास्त्रीय भाषा’ का दर्जा प्रदान किया जाए। परिषद का मानना है कि इससे आने वाली पीढ़ियां अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व कर सकेंगी।
पुनः जताया आभार
अंत में मिथिला सांस्कृतिक परिषद ने समस्त मैथिली भाषी समाज की ओर से संविधान की आठवीं अनुसूची में मैथिली को स्थान देने के लिए भारत सरकार एवं महामहिम राष्ट्रपति के प्रति पुनः आभार प्रकट किया।



