
रांची: झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में वित्त एवं वाणिज्य-कर विभाग के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षात्मक बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य की वित्तीय स्थिति, राजस्व संग्रहण, बजट प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में विभागीय मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, वित्त सचिव प्रशांत कुमार तथा वाणिज्य-कर विभाग के सचिव अमित कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
ओडिशा और छत्तीसगढ़ से बेहतर है झारखंड का खनन राजस्व
बैठक में विभिन्न वित्तीय वर्षों के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आई कि पड़ोसी राज्यों ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ की तुलना में झारखंड का खनन राजस्व (Mining Revenue) बेहतर स्थिति में है। अधिकारियों ने बताया कि खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, पारदर्शी नीतिगत व्यवस्था और प्रभावी निगरानी तंत्र के कारण राजस्व संग्रह में यह उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि अवैध खनन पर कठोर नियंत्रण स्थापित किया जाए और खनन क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों का उपयोग बढ़ाया जाए।
प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता के लिए बायोमैट्रिक प्रणाली पर जोर
हेमंत सोरेन ने प्रशासनिक कार्यों में जवाबदेही और शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बायोमैट्रिक प्रणाली (Biometric System) के व्यापक उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संबंधित कार्यालयों और विभागों में उपस्थिति तथा कार्यप्रणाली से जुड़ी प्रक्रियाओं में बायोमैट्रिक व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सभी विभागों को एक साझा दृष्टिकोण के साथ आपसी समन्वय बनाकर काम करने को कहा ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आए।
जीएसटी अनुपालन और कर चोरी रोकने के लिए वाणिज्य-कर विभाग को निर्देश
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वाणिज्य-कर विभाग की समीक्षा के दौरान वस्तु एवं सेवा कर (GST), मूल्य वर्धित कर (VAT) और प्रोफेशनल टैक्स की वसूली पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने करदाताओं के बीच स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने और कर वंचना (Tax Evasion) पर लगाम लगाने के लिए तकनीकी साधनों के माध्यम से निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। उन्होंने विभागीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए ताकि करदाताओं को सुविधा हो और राज्य के राजस्व में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।



