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Home » Jamshedpur News :मौसमी कांड– 17 साल से न्याय के लिए भटकती बीमार मां की अब टूट गई है आस
जमशेदपुर

Jamshedpur News :मौसमी कांड– 17 साल से न्याय के लिए भटकती बीमार मां की अब टूट गई है आस

BJNN DeskBy BJNN DeskMarch 1, 2026Updated:March 1, 2026No Comments5 Mins Read
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जमशेदपुर।

आज मां तापसी चौधरी ट्रेनी एयर होस्टेस दिवंगत मौसमी चौधरी की 34वीं वर्षगांठ मना रही हैं. अपने खराब तबियत को देखते हुए मां तापसी चौधरी पिछले कुछ सालों से सार्वजनिक जगह की जगह घर पर ही बेटी को श्रद्धांजलि देती हैं. शनिवार(28 फरवरी) को मौसमी चौधरी की 34वी वर्षगांठ पर पर मां तापसी चौधरी ने अपने आवास पर ही मौसमी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर और दीये जलाकर श्रद्धांजलि दी. उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता राधाकांत ओझा ने भी पुष्प चढाकर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए.

मरते दम तक न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प लेने वाली मां तापसी चौधरी की आस टूट गई है. उन्हें अब उम्मीद नहीं कि न्याय मिल पाएगा.

मौसमी कांड क्या है?
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आहा संस्थान की ट्रेनी एयर होस्टेस मौसमी चौधरी को जमशेदपुर के मशहूर होटल सोनेट से 9मई 2009 को संदिग्ध परिस्थितियों में टीएमएच लाया गया था, जहां पहले आईसीयू फिर सीसीयू में इलाजरत रहने के बाद 20 मई को उसे मृत घोषित किया गया था. मां तापसी चौधरी ने बेटी के साथ होटल में दुष्कर्म कर हत्या का आरोप लगाया था. मां का कहना था कि मौसमी की हत्या 9 मई 2009 को होटल सोनेट में ही कर दी गई थी और टीएमएच में तत्कालीन टाटा स्टील के वीपी पार्थो सेन गुप्ता के दबाव पर जबरन मौसमी के शव को सीसीयू में रखा गया था . बाद में 20मई को टीएमएच प्रबंधन ने उसे मृत घोषित कर दिया था.

मां का आरोप है कि होटल मालिक की पहुंच टाटा के अधिकारियों और पुलिस तक होने की वजह से पुलिस ने मामले की लीपापोती कर दी. बाद में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दो-दो बार सीबीआई जांच हुई, लेकिन न्याय नहीं मिला. मां ने आरोप लगाया है कि रसूखदार आरोपियों की वजह से पहले पुलिस और फिर सीबीआई भी बिक गई.

मां को सालों से न्यायालय पर भरोसा रहा. मां का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट के निशान के जिक्र हैं, जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को धारा 302 के तहत मां के बयान के आधार पर मामला दर्ज कर अनुसंधान के निर्देश दिए थे, लेकिन सीबीआई ने लीपापोती की और मामला दर्ज नहीं किया. होटल प्रबंधन द्वारा दुर्घटना के दर्ज किए मामले के आधार पर ही जांच करती रही.

उससे पहले पुलिस ने भी संदिग्ध हालत में भर्ती बताई गई मौसमी का न तो बयान लिया और न ही मेडिकल और अन्य जांच की..

Dr प्रभात हत्याकांड से तार जुड़े——-
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मां तापसी चौधरी का कहना है कि मौसमी कांड के तार टीएमएच की इमरजेंसी के तत्कालिक हेड डा.प्रभात की हत्या से जुड़े हैं. मौसमी चौधरी की कथित तौर पर हत्या के छह महीने के भीतर टीएमएच की इमरजेंसी के हेड Dr प्रभात की भी हत्या हो गई थी. मां का कहना है कि मौसमी को सबसे पहले टीएमएच के इमरजेंसी में लाया गया था, जहां शव के दाखिले को डाॅ. प्रभात ने दाखिला लेने से इंकार कर दिया था. उसके बाद घटना को छुपाने के लिए तत्कालीन टाटा स्टील के वीपी पार्थो सेनगुप्ता के दबाव पर मौसमी को पहले आईसीयू और फिर सीसीयू में दाखिल कराया गया. तापसी चौधरी ने आरोप लगाया कि मौसमी किस हालत में टीएमएच लाई गई थी, इसके अहम गवाह डाॅ. प्रभात थे, जिस वजह से उनकी भी हत्या कर दी गई.

नहीं मिली सरकारी मदद
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मां तापसी चौधरी को इस बात से तकलीफ हुई कि सरकारें आईं और गईं लेकिन किसी ने उनकी बेटी को न्याय दिलाने में कोई मदद नहीं की. तापसी चौधरी ने सरयू राय और रघुवर दास के उन बयानों की कटिंग आज भी सहेजकर रखी है, जिसमें उनलोगों ने कहा था कि मौसमी हत्याकांड के तार डा. प्रभात हत्याकांड से जुड़े हैं. उसके अलावा तमाम अन्य सबूतों को लिए वह 17 सालों से न्याय की लड़ाई लड़ रही है.

सीबीआई का दबाव–दुर्घटना मान ले मां
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मां तापसी चौधरी ने आरोप लगाया कि सीबीआई लगातार दबाव बना रही है कि वह अपनी बेटी के साथ हुई घटना को दुर्घटना मान ले और वैसी गवाही दे. लेकिन मां तापसी चौधरी ने मरते दम तक न्याय के लिए लड़ने के संकल्प को दुहराया है. फिर भी, सालों से बीमार तापसी को अब न्याय की उम्मीद नहीं है.

28 फरवरी को मौसमी का हुआ था जन्म
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दिवंगत ट्रेनी एयर होस्टेस मौसमी चौधरी का जन्म 28फरवरी 1992को हुआ था. मां कहती है कि आज वह जीवित होती तो 34 वर्ष की होती.

भले ही टीएमएच प्रबंधन ने 20मई 2009 को मौसमी को मृत घोषित किया, लेकिन मां तापसी 9 मई को ही पुण्यतिथि मनाती है. तापसी कहती हैं कि वे मरते दम तक इस बयान पर कायम रहेंगी कि 09मई को ही मौसमी के साथ होटल में दुष्कर्म कर हत्या कर दी गई थी और आईवाश करने के लिए होटल मालिक और प्रबंधन के अन्य सदस्यों के कहने पर टाटा स्टील के तत्कालीन वीपी पार्थो सेनगुप्ता की मदद से मौसमी के शव को 11दिनों तक टीएमएच में रखा गया था. वहीं बिष्टुपुर थाने में होटल प्रबंधन ने दुर्घटना का मामला दर्ज करवाया जबकि तत्कालीन बिष्टुपुर थाना प्रभारी नीरज मिश्रा ने मौसमी कांड को लेकर कई दिनों तक न तो घटनास्थल का दौरा किया और न ही मौसमी की मां का बयान लेकर मामला दर्ज किया..तत्कालीन झारखंड हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्र ने कर्तव्य में लापरवाही को लेकर नीरज मिश्रा को निलंबित करने के आदेश दिए थे.

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