
जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सत्यनारायण मारवाड़ी मंदिर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठवें दिन सोमवार को पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। कथा वाचक सीताराम शास्त्री ने व्यासपीठ से रासलीला, उद्धव-गोपी संवाद और रुक्मिणी विवाह के प्रसंगों की दिव्य व्याख्या की। उन्होंने बताया कि ये तीनों प्रसंग जीव (आत्मा) और परमात्मा (ईश्वर) के बीच के अटूट रिश्ते, अगाध प्रेम और पूर्ण समर्पण को दर्शाते हैं।

ईश्वर और जीव के दिव्य मिलन का नाम है ‘रास’
कथावाचक ने गोपियों के साथ भगवान कृष्ण की प्रेम लीला और प्रेम की परीक्षा का मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि संसार में हमेशा प्रेम की ही परीक्षा होती है। रासलीला कोई साधारण नृत्य नहीं, बल्कि जीव और ब्रह्म की एकता का नाम है। यह जीवात्मा का परमात्मा के साथ दिव्य मिलन का महापर्व है। कथा के दौरान सुमधुर भजनों पर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध होकर भक्तिरस में झूमने लगे।
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रुक्मिणी विवाह से दूर होती हैं वैवाहिक समस्याएं
रुक्मिणी विवाह के प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए सीताराम शास्त्री ने कहा कि रुक्मिणी जीव का प्रतीक हैं और श्रीकृष्ण ब्रह्म हैं। दोनों का मिलन ही ‘रुक्मिणी मंगल’ है। जो भक्त पूर्ण विश्वास से ईश्वर को पुकारता है, भगवान उसकी रक्षा के लिए स्वयं आते हैं। जैसे रुक्मिणी की पुकार पर श्रीकृष्ण कुंडिनपुर पहुंचे और राजाओं को परास्त कर उनसे विवाह किया। मान्यता है कि इस विवाह उत्सव में शामिल होने वाले भक्तों की वैवाहिक समस्याएं हमेशा के लिए समाप्त हो जाती हैं।
समापन आज: सुदामा चरित्र और हवन के साथ पूर्णाहुति
यह आयोजन सामाजिक एवं धार्मिक संस्था ‘सोनारी भजन संध्या’ की 15 महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। सोमवार को यजमान के रूप में कुमकुम-अशोक गोयल और रुक्मिणी-रमेश खेमका ने व्यासपीठ का पूजन व आरती की। कथा में बीना अग्रवाल, मंजू मुसद्दी, सुशीला अग्रवाल, कृष्णा अग्रवाल, पुष्पा अग्रवाल, निर्मला अग्रवाल, कुमकुम अग्रवाल, मीरा खेमका, विनीता मस्करा, सरिता अग्रवाल, रजनी मित्तल, रुक्मणी खेमका, शांति गोयनका, मंजू आगीवाल, सरिता कटारका, मीरा अग्रवाल, विभा दुदानी और मंजू खंडेलवाल सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे। मंगलवार को कथा के सातवें व अंतिम दिन सुदामा चरित्र, श्रीकृष्ण स्वधाम गमन की कथा और हवन-पूर्णाहुति के साथ इसका समापन होगा।
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