जमशेदपुर। “मानवता का धर्म केवल मानव सेवा तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह प्रत्येक जीव-जंतु के प्रति संवेदना और दया भाव रखने में भी निहित है।” इस विचार को चरितार्थ करते हुए जमशेदपुर के कदमा निवासी और समाजसेवी श्रीकांत देव ने शनिवार को एक बेजुबान पक्षी की जान बचाकर समाज के सामने मानवता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की है। उन्होंने अपनी सूझबूझ और तत्परता से एक ऐसे पक्षी को नया जीवन दिया, जो शायद किसी की नजर न पड़ने पर तड़प-तड़प कर अपनी जान दे देता। श्रीकांत देव के इस नेक कार्य की आस-पास के लोग काफी सराहना कर रहे हैं।
मॉर्निंग वॉक से लौटते समय पड़ी तड़पते पक्षी पर नजर
घटना का विवरण देते हुए समाजसेवी श्रीकांत देव ने बताया कि शनिवार सुबह वे अपनी नियमित दिनचर्या के अनुसार मॉर्निंग वॉक (सुबह की सैर) के लिए निकले थे। जब वे सैर से वापस अपने घर लौटे, तो उनकी नजर अपनी छत पर गई। वहां उन्होंने देखा कि एक पक्षी बेहद बुरी तरह से छटपटा रहा है और उड़ने का प्रयास कर रहा है, लेकिन वह उड़ नहीं पा रहा है। पक्षी की यह दयनीय स्थिति देखकर श्रीकांत देव तुरंत छत पर पहुंचे। वहां जाकर उन्होंने जो देखा, उससे उन्हें पक्षी की पीड़ा का अंदाजा हो गया।
पैर में उलझी थी धागेनुमा रस्सी, सूझबूझ से किया मुक्त
करीब जाने पर श्रीकांत देव ने पाया कि उस बेजुबान पक्षी का पैर एक धागेनुमा मजबूत रस्सी में बुरी तरह से उलझ गया था। रस्सी का फंदा इतना कस गया था कि पक्षी जितना फड़फड़ाता, फंदा उतना ही कसता जा रहा था। बिना एक पल की भी देरी किए, श्रीकांत देव ने बड़ी ही सावधानी और प्यार से पक्षी को अपने हाथों में पकड़ा। इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे और बड़ी ही सूझबूझ के साथ पक्षी के पैर में फंसी उस रस्सी को खोला। रस्सी से आजाद होते ही पक्षी ने राहत की सांस ली। श्रीकांत देव ने उसे सुरक्षित आसमान में छोड़ दिया, जहां वह फिर से अपनी आजादी की उड़ान भर सका।
हर जीव की जान कीमती है, बेजुबानों की मदद के लिए आगे आएं लोग
इस घटना के बाद अपने विचार साझा करते हुए श्रीकांत देव ने कहा, “मैं यह दृढ़ता से मानता हूं कि जान सब की बराबर होती है, चाहे वह इंसान हो या कोई छोटा सा जीव। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई बोलकर अपना दुख प्रकट कर सकता है और कोई बेजुबान होता है।” उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि कोई बेजुबान जीव-जंतु किसी भी प्रकार के संकट में दिखाई दे, तो उसे नजरअंदाज न करें, बल्कि उसकी मदद करें। ऐसे बेजुबानों को भी मानव सेवा और हमारी करुणा की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उनकी यह छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण पहल समाज को जीवों के प्रति संवेदनशील होने का एक बड़ा संदेश देती है।






