जमशेदपुर। टाटानगर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी को लेकर चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। रेल यात्री संघर्ष समिति ने रेलवे प्रशासन द्वारा जारी किए गए कुछ वीडियो पर कड़ा ऐतराज जताया है। समिति का आरोप है कि रेलवे अस्पष्ट और संदिग्ध वीडियो जारी कर यात्रियों की वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है, जो कि निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
“वीडियो में न ट्रेन का पता, न यात्री की पहचान”
समिति के संयोजक शिव शंकर सिंह ने कहा कि रेलवे जो वीडियो साक्ष्य के तौर पर पेश कर रहा है, उनमें पारदर्शिता का अभाव है। यह पता ही नहीं चलता कि वे वीडियो कब के हैं, उसमें बोलने वाले यात्री कौन हैं और वे किस ट्रेन से यात्रा कर रहे हैं। समिति का कहना है कि जब यात्री घंटों की देरी और अव्यवस्थित संचालन से जूझ रहे हैं, तब रेलवे द्वारा ‘सब कुछ ठीक है’ जैसा भ्रामक प्रचार करना यात्रियों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
पारदर्शिता की मांग: आंकड़ों के साथ सामने आए रेलवे
संयोजक शिव शंकर सिंह, सुबोध श्रीवास्तव और अजय कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि यदि वास्तव में ट्रेनों के संचालन में सुधार हुआ है, तो रेल प्रशासन को इसे पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक करना चाहिए। केवल कुछ चुनिंदा वीडियो जारी कर देने से जमीनी हकीकत नहीं बदल जाती। उन्होंने मांग की है कि रेलवे गैर-जिम्मेदाराना कृत्यों से बाज आए और ट्रेनों की लेटलतीफी समाप्त करने हेतु ठोस कदम उठाए।
हस्ताक्षर अभियान में उमड़ा था यात्रियों का गुस्सा
गौरतलब है कि बीते रविवार, 26 अप्रैल को टाटानगर स्टेशन पर समिति द्वारा एक विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था। इसमें हजारों यात्रियों ने हस्ताक्षर कर रेलवे के खिलाफ अपना आक्रोश दर्ज कराया था। समिति ने साफ कर दिया है कि यात्रियों का समय मूल्यवान है और उसका सम्मान करना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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उग्र आंदोलन की चेतावनी
समिति ने रेलवे प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब यात्रियों के धैर्य की परीक्षा न ली जाए। यदि जल्द ही ट्रेनों का परिचालन समय पर सुनिश्चित नहीं किया गया, तो आंदोलन को और अधिक उग्र एवं व्यापक रूप दिया जाएगा। समिति ने दो टूक कहा:
“यदि ट्रेनें समय पर चलने लगती हैं, तो किसी भी आंदोलन की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाएगी। लेकिन जब तक स्थिति नहीं सुधरती, हम चुप नहीं बैठेंगे।”



