जमशेदपुर । जुगसलाई क्षेत्र स्थित साफी गंज मोहल्ले के निवासी इन दिनों एक भीषण और जानलेवा जल संकट का सामना कर रहे हैं। पानी की किल्लत अब यहां एक विकराल रूप ले चुकी है। शहीद ठाकुर जी पाठक वेलफेयर सोसाइटी (राष्ट्रीय विंग) के सदस्य और स्थानीय निवासी पिछले साढ़े तीन (3.5) सालों से इस गंभीर जल संकट के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रशासन और नगर पालिका की लापरवाही के कारण यहां के निवासियों का जीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और वे बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज हैं। 45 डिग्री सेल्सियस की चिलचिलाती और झुलसाने वाली गर्मी में पानी की इस भारी कमी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, लेकिन संबंधित अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।
डीसी ऑफिस के चक्कर काट रहे 200 से अधिक निवासी
साफी गंज मोहल्ले के 200 से अधिक निवासियों ने सोसाइटी के सदस्यों के साथ मिलकर अपने अधिकारों के लिए कई बार उपायुक्त (डीसी) कार्यालय का घेराव किया है। स्थानीय लोगों ने अपनी इस बुनियादी जरूरत को लेकर कई बार लिखित शिकायतें और मांग पत्र सौंपे हैं। सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने और अनगिनत अपीलों के बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस और जमीनी कदम नहीं उठाया गया है। अधिकारियों के केवल खोखले आश्वासनों ने जनता के बीच भारी निराशा और व्यवस्था के प्रति गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।
पाइपलाइन का टेंडर पास हुए बीते 8 महीने, धरातल पर काम शून्य
इस पूरे मामले में सबसे बड़ी प्रशासनिक विडंबना यह है कि नई पाइपलाइन बिछाने के काम को कागजों पर मंजूरी दे दी गई है। टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है, लेकिन धरातल पर सच्चाई बिल्कुल उलट है। टेंडर पास हुए 8 महीने से ज्यादा का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन आज तक मोहल्ले में पाइपलाइन का काम शुरू नहीं हो पाया है। इस प्रशासनिक ढिलाई और लालफीताशाही का खामियाजा सीधे तौर पर आम जनता को भुगतना पड़ रहा है, जो हर दिन एक नई उम्मीद के साथ पानी का इंतजार करते हैं।
5.3 सालों से टैंकरों पर निर्भर जिंदगी, पानी के लिए मोहल्ले में हो रहे विवाद
स्थानीय निवासियों का दर्द बयान करते हुए बताया गया कि वे पिछले 5.3 सालों से पानी की आपूर्ति के लिए पूरी तरह से पानी के टैंकरों पर ही निर्भर हैं। लेकिन दुर्भाग्य से यह टैंकर व्यवस्था भी बिल्कुल सुचारू नहीं है। मोहल्ले में आने वाले टैंकरों से केवल आधी आबादी को ही थोड़ा-बहुत पानी मिल पाता है, जबकि बाकी बचे लोगों को खाली बर्तन लेकर निराश लौटना पड़ता है। इस असमान वितरण और पानी की भारी कमी के कारण आए दिन मोहल्ले के लोगों के बीच तनाव, विवाद और आपसी झगड़े होते रहते हैं।
बिना पानी मिले ही भर रहे टैक्स, नगर पालिका चुनाव से पहले बढ़ा जनाक्रोश
स्थानीय जनता की परेशानी सिर्फ पानी न मिलने तक ही सीमित नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले 3.5 सालों से निवासियों को नल से पानी की एक बूंद नहीं मिली है, लेकिन इसके बावजूद उनसे लगातार जल कर (वाटर टैक्स) वसूला जा रहा है। बिना सुविधा दिए टैक्स वसूलने की इस व्यवस्था को लेकर लोगों में भारी रोष है। आगामी नगर पालिका चुनावों के करीब होने के बावजूद, किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने इस ज्वलंत समस्या का स्थायी समाधान निकालने की जहमत नहीं उठाई है। प्रभावित निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस जल संकट का तत्काल समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।
इस लंबे विरोध प्रदर्शन और संघर्ष में मोहल्ले के कई प्रमुख लोग लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। इनमें चंद्र पाठक, प्रह्लाद, सूर्या, एकता, सुनीता, गोलू सोनकर, दानजीत, अजय, विशाल, पप्पू, शानू शर्मा, रिंकू शर्मा और बड़ी संख्या में अन्य स्थानीय निवासी प्रमुख रूप से शामिल हैं।




