
नई दिल्ली/जमशेदपुर.


जमशेदपुर को इंडस्ट्रियल टाउनशिप घोषित करने वाली अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को अहम सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जाॅयमाला बागची, और जस्टिस विपुल पंचाली की खंडपीठ ने इस मामले में भारत सरकार को भी प्रतिवादी बनाए जाने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही केंद्र सरकार को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा.
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चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने की सुनवाई
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने की. अदालत ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई के दौरान सबसे पहले टाटा स्टील की आपत्तियों को सुना जाएगा, इसके बाद मामले में आगे की बहस होगी.
याचिकाकर्ता को मिला जवाब दाखिल करने का समय
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता जवाहरलाल शर्मा को काउंटर दस्तावेज (प्रति उत्तर) दाखिल करने के लिए लगभग दो सप्ताह का समय दिया है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस प्रकरण की अगली सुनवाई करीब छह सप्ताह बाद की जाएगी.
क्या है पूरा मामला
इस याचिका के जरिए जमशेदपुर में नगर निगम के गठन की मांग और वर्ष 2023 में जारी इंडस्ट्रियल टाउनशिप अधिसूचना को चुनौती दी गई है. सोनारी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में दायर रिट याचिका में मांग की है कि जमशेदपुर में नगर निगम का गठन किया जाए और इंडस्ट्रियल टाउनशिप की अधिसूचना को निरस्त किया जाए. उनका कहना है कि यह अधिसूचना असंवैधानिक है.
मताधिकार और निर्वाचित निकाय का मुद्दा
याचिकाकर्ता का तर्क है कि वर्तमान में जमशेदपुर में कोई निर्वाचित नगर निकाय नहीं है, जिससे स्थानीय प्रशासन और नागरिक सुविधाओं में जनता का प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व नहीं हो पा रहा है. उन्होंने कहा कि शहरवासियों को तीसरे मताधिकार यानी नगर निकाय चुनाव में मतदान का अधिकार भी नहीं मिल रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के विरुद्ध है.
1989 के आदेश का अब तक पालन नहीं
उल्लेखनीय है कि इसी मुद्दे पर जवाहरलाल शर्मा द्वारा वर्ष 1988 में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 1989 में ही जमशेदपुर में नगरपालिका गठन का आदेश दिया था. हालांकि, याचिकाकर्ता के अनुसार, किसी भी सरकार ने अब तक उस आदेश को धरातल पर लागू नहीं किया. इसके विपरीत वर्ष 2023 में राज्य सरकार द्वारा इंडस्ट्रियल टाउनशिप की अधिसूचना जारी कर दी गई, जिसके खिलाफ यह नई रिट याचिका दाखिल की गई है.
अगली सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में केंद्र सरकार, टाटा स्टील और अन्य पक्षकारों के जवाब के बाद सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. जमशेदपुर के भविष्य, नगर निगम गठन और नागरिक अधिकारों से जुड़े इस मामले पर पूरे शहर की निगाहें अदालत के आगामी फैसले पर टिकी हुई हैं.


