जमशेदपुर।
पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड (Baharagora Block) के पूर्वांचल क्षेत्र में इन दिनों किसान भारी चिंता और असमंजस के दौर से गुजर रहे हैं। महीनों की हाड़तोड़ मेहनत के बाद तैयार हुई धान की फसल अब बिकने को पूरी तरह तैयार है, लेकिन धान अधिप्राप्ति (Paddy Procurement) की वर्तमान स्थिति और सरकारी लेटलतीफी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। अधिप्राप्ति की अंतिम तिथि बढ़ाए जाने को लेकर लगातार खबरें तो आ रही हैं, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक और स्पष्ट आदेश जारी नहीं होने से पूरी खरीद व्यवस्था अधर में लटकी हुई है।
किसानों की परेशानी और उनका असमंजस
बहरागोड़ा प्रखंड के विभिन्न गांवों के किसानों ने एकजुट होकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। बृंदावनपुर गांव के पीयूष प्रधान, जामशोला गांव के निर्मल मुर्मू, पांचरुलिया गांव के दिव्येंदु मिश्रा और दिघीमुड़ा गांव के शिव शंकर नायक सहित कई अन्य किसानों ने संयुक्त रूप से अपनी समस्याएं साझा की हैं। इन किसानों का स्पष्ट कहना है कि वे अपनी खून-पसीने से उपजाई गई धान की फसल को बेचने के लिए पूरी तरह से तैयार बैठे हैं। धान बोरियों में पैक है, लेकिन तिथि विस्तार को लेकर कोई ठोस सरकारी निर्देश नहीं होने के कारण वे बुरी तरह असमंजस में हैं।
केंद्रों पर निर्देशों का अभाव
किसानों की समस्या केवल तिथि की अनिश्चितता तक ही सीमित नहीं है। एक ओर उन्हें विभिन्न माध्यमों से यह जानकारी मिल रही है कि सरकार धान खरीद की तिथि आगे बढ़ा सकती है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर संचालित धान अधिप्राप्ति केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। केंद्र के कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनके पास उच्चाधिकारियों से कोई लिखित और स्पष्ट निर्देश नहीं आ जाता, वे धान की खरीददारी शुरू नहीं कर सकते। इस दोहरी स्थिति ने किसानों को परेशान कर दिया है। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि वे मजबूरी में अपना धान कम कीमत पर खुले बाजार में व्यापारियों को बेच दें या फिर सरकारी आदेश का इंतजार करें।
आर्थिक संकट और फसल खराब होने का डर
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के लिए समय पर फसल का बिकना उनके जीवनयापन के लिए बेहद जरूरी होता है। उन्हें अगली फसल की तैयारी, कर्ज चुकाने और अपनी रोजमर्रा की पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तत्काल नकदी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, घरों या अस्थाई जगहों पर रखे धान के नमी या बेमौसम बारिश के कारण खराब होने का भी भारी डर हमेशा बना रहता है। यदि इंतजार के चक्कर में धान खराब हो गया, तो उन्हें इसकी भारी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
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प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की अपील
बहरागोड़ा के पूर्वांचल क्षेत्र के सभी प्रभावित किसानों ने जिला प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग से पुरजोर अपील की है कि धान अधिप्राप्ति की तिथि के संबंध में जो भी निर्णय है, उसे बिना किसी देरी के सार्वजनिक किया जाए। यदि तिथि बढ़ाई जा रही है, तो तुरंत इसका आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर अधिप्राप्ति केंद्रों को दोबारा सुचारु रूप से चालू किया जाए, ताकि किसान अपनी उपज सही दाम पर बेचकर राहत की सांस ले सकें।





