जमशेदपुर।
झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) और राज्य की नियोजन नीति में मैथिली भाषा को क्षेत्रीय व जनजातीय भाषा की सूची से बाहर रखे जाने पर विवाद गहराता जा रहा है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा जारी नई सूची में मैथिली को स्थान नहीं दिए जाने से राज्य के लगभग 25 लाख मैथिली भाषियों में भारी क्षोभ की लहर है। इस निरंतर उपेक्षा के खिलाफ रविवार, 19 अप्रैल 2026 को साकची स्थित केनेलाइट होटल में ‘मैथिली भाषा संघर्ष समिति, झारखंड’ के तत्वावधान में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। मानस मिश्रा की अध्यक्षता में संपन्न इस बैठक में मैथिली भाषा को उसका उचित हक दिलाने के लिए आगे की रणनीतियों पर गंभीर मंथन किया गया।
साकची में प्रमुख मैथिल संस्थाओं का महाजुटान
इस अति महत्वपूर्ण बैठक में जमशेदपुर की सभी प्रमुख मैथिल संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इनमें अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद, मिथिला सांस्कृतिक परिषद, परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति, विद्यापति परिषद (बागबेड़ा) और स्वर्गीय ललित नारायण सांस्कृतिक एवं सामाजिक समिति के पदाधिकारी शामिल रहे। बैठक के संयोजक पंकज झा ने उपस्थित सदस्यों को झारखंड की नियोजन नीति में मैथिली भाषा की हो रही निरंतर उपेक्षा की अद्यतन जानकारी दी और सभी को एकजुट होकर एक मजबूत लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।
मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रयासों की हुई सराहना
समिति ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि विगत दिनों (15 अप्रैल 2026) मैथिली, अंगिका, भोजपुरी और मगही भाषा को शामिल कराने की दिशा में निरंतर संघर्षरत राज्य की ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह के प्रयासों से झारखंड कैबिनेट ने अपने प्रस्ताव पर पुनर्विचार तक रोक लगा दी है। बैठक में सर्वसम्मति से मंत्री की इस पहल की सराहना की गई और उनका आभार प्रकट किया गया।
समिति ने याद दिलाया कि पिछले वर्ष 20 जून 2025 को भी उन्होंने मंत्री दीपिका पांडेय सिंह से भेंट कर ज्ञापन सौंपा था, जिसके बाद मंत्री ने समिति के प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मिलवाकर बात रखने का मौका दिया था। इसके अलावा हाल ही में 15 मार्च 2026 को मिथिला सांस्कृतिक परिषद के वार्षिक समारोह में भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुईं मंत्री दीपिका पांडेय को फिर से मांग पत्र सौंपकर सहयोग की अपील की गई थी।
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द्वितीय राजभाषा होने के बावजूद उपेक्षा दुर्भाग्यपूर्ण
बैठक में वक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि मैथिली भाषा को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मानजनक स्थान प्राप्त है और झारखंड में भी इसे ‘द्वितीय राजभाषा’ का दर्जा दिया गया है। ऐसे में झारखंड की नियोजन नीति और शिक्षक पात्रता परीक्षा में मैथिली को स्थान न मिलना पूरी तरह से एक अप्रासंगिक और विभेदकारी कदम है। समिति ने बताया कि वर्ष 2023 में तत्कालीन राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को भी इस मांग को लेकर लगभग 7000 हस्ताक्षरों वाला ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकला।
मांगें नहीं मानी गईं तो धरातल पर उतरेगा उग्र आंदोलन
बैठक में चेतावनी दी गई कि यदि सरकार जल्द इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो एक विस्तृत कार्ययोजना के तहत इस लड़ाई को धरातल पर उतारा जाएगा। समिति ने तय किया है कि अगली कैबिनेट बैठक से पहले सभी संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभाग के समक्ष अपना पक्ष मजबूती से रखा जाएगा। इसके लिए राज्य भर की सभी मैथिली समितियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। समिति ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी इस दिशा में उचित सहयोग और सकारात्मक हस्तक्षेप की मांग की है।
बैठक के अंत में अनूप (ज्योति) मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। इस अहम बैठक में मुख्य रूप से मिथिला सांस्कृतिक परिषद से मोहन ठाकुर, धर्मेश (लड्डू) झा, परमहंस लक्ष्मीनाथ गोस्वामी समिति से मानस मिश्रा, विद्यापति परिषद से अनूप (ज्योति) मिश्रा, अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद से अमरनाथ झा (रांची), हंसराज जैन, पंकज कुमार झा, राजीव रंजन झा, विभाष चौधरी और कृष्ण कामत सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।





