जमशेदपुर । करीम सिटी कॉलेज के मानगो कैंपस (शिक्षा संकाय) में 22 अप्रैल 2026 को एक अत्यंत महत्वपूर्ण दो दिवसीय अंतरविषयी राष्ट्रीय संगोष्ठी (National Seminar) का भव्य शुभारंभ हुआ। इस संगोष्ठी का मुख्य विषय ‘नई शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में उच्च शिक्षा में गुणवत्ता’ (Quality Education in Higher Education in the Context of NEP 2020) रखा गया है। इस सेमिनार का मूल उद्देश्य भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता सुधार, आधुनिक नवाचार और नई शिक्षा नीति के दूरगामी प्रभावों पर शिक्षाविदों के साथ गहन विचार-विमर्श करना है।
दीप प्रज्वलन और अतिथियों के स्वागत से हुई शुरुआत
कार्यक्रम के पहले दिन की शुरुआत सुबह 10:00 बजे प्रतिभागियों के पंजीकरण के साथ हुई। इसके बाद सुबह 11:00 बजे मुख्य उद्घाटन सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें दीप प्रज्वलन और सुमधुर स्वागत गीत के साथ कार्यक्रम को विधिवत गति दी गई। कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. मो. रेयाज ने मंच पर उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों और वक्ताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। इसके पश्चात, इस राष्ट्रीय संगोष्ठी की कन्वेनर डॉ. परवीन उस्मानी ने सेमिनार के मुख्य विषय की प्रासंगिकता और वर्तमान शिक्षा जगत में इसकी उपयोगिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डिजिटल शिक्षा, डेटा और भारतीय ज्ञान व्यवस्था पर मंथन
इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान प्रतिष्ठित रिसोर्स पर्सन के रूप में इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग के डॉ. प्रो. शिबानुर रहमान ने अपना संबोधन दिया। उन्होंने तकनीकी युग में शिक्षा के बदलते स्वरूप पर बात करते हुए बताया कि कैसे इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का उपयोग करके आज देश के किसी भी सुदूर हिस्से से उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त की जा सकती है।
कार्यक्रम में की-नोट स्पीकर (मुख्य वक्ता) के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के डॉ. राजेश वर्मा ने अपना प्रभावशाली मुख्य भाषण प्रस्तुत किया। उन्होंने ‘न्यू कॉलोनाइजेशन’ (नव-उपनिवेशवाद) के वर्तमान सन्दर्भ में डेटा (Data) के बढ़ते महत्व और इसकी ताकत पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, उन्होंने नई शिक्षा नीति (NEP) में गहराई से निहित ‘भारतीय ज्ञान व्यवस्था’ (Indian Knowledge System) की खूबियों और इसकी आवश्यकता पर भी महत्वपूर्ण विचार साझा किए।
भारतीय और यूरोपीय शिक्षा प्रणाली की तुलनात्मक चर्चा
इस भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अरका जैन यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ. प्रो. सैयद सफदर रज़ी ने उपस्थित होकर समारोह की शोभा बढ़ाई। डॉ. रज़ी ने अपने संबोधन में भारतीय शिक्षा व्यवस्था और यूरोपीय शिक्षा व्यवस्था का एक बहुत ही शानदार तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने लंबे शैक्षणिक करियर के व्यक्तिगत अनुभवों को बेहद रुचिकर और रोचक ढंग से सभी प्रतिभागियों के साथ साझा किया, जिसने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
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तकनीकी सत्र और देश भर से जुटे 200 प्रतिभागी
इस राष्ट्रीय स्तर की संगोष्ठी में देश के विभिन्न राज्यों और शैक्षणिक संस्थानों से लगभग 200 प्रतिभागी हिस्सा लेने पहुंचे हैं। उद्घाटन सत्र के इस पूरे कार्यक्रम का सफल और उत्कृष्ट मंच संचालन डॉ. नुसरत बेग़म द्वारा किया गया। सत्र के अंत में शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. सुचेता भुइयां ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति ‘धन्यवाद ज्ञापन’ प्रस्तुत किया। राष्ट्रगान के साथ इस प्रथम सत्र का विधिवत समापन हुआ। इसके पश्चात लंच ब्रेक हुआ और फिर सायं 5:00 बजे तक एक गहन तकनीकी सत्र (Technical Session) का आयोजन किया गया, जिसमें शोधार्थियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए।






