
जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर में दुर्गा पूजा महोत्सव की धूम है। शहर के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों में शामिल उत्कल समाज ने इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए दक्षिण भारत के प्रसिद्ध रामेश्वरम मंदिर की थीम पर भव्य पूजा पंडाल तैयार किया है। आकर्षक वास्तुकला, पारंपरिक सजावट और भव्य स्वरूप के कारण यह पंडाल श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। वहीं, महाअष्टमी पर लगभग 3000 हांडी भोग तैयार करने की परंपरा इस आयोजन को विशेष बनाती है।
उत्कल समाज के उपाध्यक्ष देवी प्रसाद दास ने बताया कि दुर्गा पूजा को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया गया है।
पश्चिम बंगाल के कारीगरों ने 30 दिनों में तैयार किया पंडाल
इस वर्ष उत्कल समाज के दुर्गा पूजा पंडाल को दक्षिण भारतीय मंदिरों की स्थापत्य कला से प्रेरित स्वरूप दिया गया है। इसकी मुख्य थीम रामेश्वरम मंदिर की वास्तुकला पर आधारित है।
पंडाल को तैयार करने के लिए पश्चिम बंगाल से विशेष कारीगरों को बुलाया गया था। लगभग एक महीने की मेहनत के बाद पंडाल को अंतिम रूप दिया गया। इसके निर्माण और आयोजन से जुड़े कार्यों का संचालन जमशेदपुर की आरके इवेंट्स (RK Events) के माध्यम से किया गया है।
Utkal Samaj in Jamshedpur has built a magnificent Durga Puja pandal based on the theme of South India’s Rameshwaram Temple! The main attraction will be the distribution of ‘3000 Handi Bhog’ on Maha Ashtami. Elaborate security arrangements are in place.
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— Bihar Jharkhand News Network (@BJNN02) October 19, 2026
200 वॉलिंटियर्स संभालेंगे सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन
उत्कल समाज ने दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं।
समिति के उपाध्यक्ष देवी प्रसाद दास के अनुसार, उत्कल समाज के 500 से अधिक सदस्यों में से लगभग 200 वॉलिंटियर्स को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
पंडाल परिसर और आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। आग से बचाव के लिए अग्निशामक यंत्रों की व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के रास्तों को सुगम रखने पर भी विशेष ध्यान दिया गया है।
समिति का प्रयास है कि पूजा दर्शन के लिए आने वाले लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
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महाअष्टमी पर 3000 हांडी भोग तैयार करने की परंपरा
उत्कल समाज की दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण महाअष्टमी पर तैयार किया जाने वाला पारंपरिक भोग है। समिति की ओर से इस वर्ष भी लगभग 3000 हांडी भोग तैयार करने की व्यवस्था की जा रही है।
देवी प्रसाद दास ने बताया कि यह आयोजन वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। समिति बिना किसी मुनाफे के भोग की व्यवस्था करती है।
इतने बड़े पैमाने पर भोग तैयार करने और वितरण की व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई हैं।
अलग-अलग टीमों को सौंपी गई आयोजन की जिम्मेदारी
उत्कल समाज ने पूजा महोत्सव के सफल संचालन के लिए कई टीमों का गठन किया है। इनमें रसोई, भोग वितरण, साज-सज्जा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां अलग-अलग सदस्यों को दी गई हैं।
समिति का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं को बनाए रखते हुए श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में मां दुर्गा के दर्शन कराना है।

