
जमशेदपुर। शहर के साकची स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर में आयोजित आठ दिवसीय दिव्य श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव का गुरुवार, 13 जून को विधिवत रूप से समापन हो गया। फतेहचंद सुरजमल परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक महोत्सव में शहर और आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। कथा के अंतिम दिन 14 जून (शुक्रवार) को मंदिर परिसर में पूर्णाहुति हवन और विशाल भंडारा प्रसादी का आयोजन किया जाएगा।

READ MORE :JAMSHEDPUR NEWS: विश्व रक्तदाता दिवस पर विशेष: जमशेदपुर बना स्वैच्छिक रक्तदान की मिसाल, एक वर्ष में 57 हजार से अधिक यूनिट का संग्रह
कथा व्यास ने सुनाया सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष प्रसंग
7 जून को एक भव्य कलश शोभायात्रा के साथ शुरू हुए इस कथा महोत्सव के अंतिम दिन कथा व्यास आचार्य राजेन्द्र जी महाराज ने अपने मधुर प्रवचन से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने सुदामा चरित्र (Sudama Charitra) और परीक्षित मोक्ष प्रसंग का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। सुदामा और श्रीकृष्ण की सच्ची मित्रता का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। आचार्य जी ने उपस्थित जनसमूह को भक्ति, निःस्वार्थ सेवा और सत्संग का अमूल्य संदेश दिया।
आठ दिनों तक चले इस महोत्सव में भीष्म स्तुति, परीक्षित जन्म, ध्रुव चरित्र, जड़भरत कथा, श्रीराम जन्म, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, गोवर्धन पूजा, महारास और रुक्मिणी विवाह जैसे पवित्र प्रसंगों का सविस्तार वर्णन किया गया। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण और जयकारों से गूंजता रहा।
आज 11:15 बजे होगा हवन, दोपहर 1 बजे से भंडारा
आयोजकों ने जानकारी देते हुए बताया कि 14 जून को इस धार्मिक अनुष्ठान की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी पूरी की जाएगी।
पूर्णाहुति हवन: प्रातः 11:15 बजे मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति हवन का आयोजन किया जाएगा।
भंडारा प्रसादी: हवन की समाप्ति के पश्चात दोपहर 1:00 बजे से विशाल भंडारा प्रसादी का वितरण शुरू होगा।
आयोजक फतेहचंद सुरजमल परिवार ने शहर के सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे सपरिवार उपस्थित होकर भगवान का प्रसाद ग्रहण करें और पुण्य के भागी बनें।
READ MORE :JAMSHEDPUR NEWS: बिष्टुपुर रीबॉक स्टोर की 10वीं वर्षगांठ पर भव्य समारोह, सरयू राय ने किया उद्घाटन
शास्त्रीय ज्ञान और सरल भाषा के धनी हैं आचार्य राजेन्द्र महाराज
आचार्य राजेन्द्र जी महाराज को देश के प्रमुख युवा भागवताचार्यों में गिना जाता है। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के हथगांव में 5 जनवरी 1981 को जन्मे आचार्य जी ने संस्कृत और शास्त्रों का गहरा अध्ययन किया है। उन्हें व्याकरण, वेद, कर्मकांड और ज्योतिष में विशेष ज्ञान प्राप्त है।
उन्होंने 1994 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संबद्ध संस्कृत अध्ययन परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जिसके बाद उन्हें स्वामी 108 रामदास त्यागी महाराज से दीक्षा प्राप्त हुई। देश भर में भागवत और श्रीकृष्ण कथा का वाचन करने वाले आचार्य जी अपने प्रवचनों में अत्यंत सरल भाषा और सटीक शास्त्रीय प्रमाणों का उपयोग करते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म और संस्कृति का व्यापक प्रचार-प्रसार करना है। वे श्रीमद्भागवत कथा को मनुष्य के जीवन को सफल बनाने का सबसे सकारात्मक और आध्यात्मिक मार्ग बताते हैं।



