
जमशेदपुर। 14 जून को नोबेल पुरस्कार विजेता और एबीओ ब्लड ग्रुपिंग सिस्टम के जनक कार्ल लैंडस्टेनर के जन्मदिन को विश्व रक्तदाता दिवस (World Blood Donor Day) के रूप में मनाया जाता है। रेड क्रॉस सोसायटी (पूर्वी सिंहभूम) और लौहनगरी जमशेदपुर के लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि इस शहर के रक्तदाता पूरे भारत वर्ष में सबसे जागरूक माने जाते हैं। आज इस शहर में रक्त के अभाव में किसी की जान नहीं जाती। कोरोना काल का डर हो या भीषण गर्मी, इस शहर के रक्तदाताओं ने हमेशा मानवता की रक्षा के लिए अपना रक्त निस्वार्थ भाव से देकर लोगों को नया जीवन दिया है।

जमशेदपुर में रक्तदान के शानदार और प्रेरणादायक आंकड़े
जमशेदपुर ब्लड सेंटर इस पूरे क्षेत्र (पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां और पश्चिमी सिंहभूम) की 90 प्रतिशत रक्त जरूरतों को पूरा करता है। वर्ष 2025-26 के शानदार आंकड़ों के अनुसार, जमशेदपुर ब्लड सेंटर और विभिन्न शिविरों के माध्यम से कुल 57,528 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया, जिसमें से 45,302 यूनिट केवल 506 रक्तदान शिविरों से प्राप्त हुआ।
स्वैच्छिक रक्तदान के मामले में जमशेदपुर देश के सबसे उत्कृष्ट शहरों में से एक है। जहां अन्य बड़े शहरों में रिप्लेसमेंट डोनेशन 20-25 प्रतिशत तक होता है, वहीं जमशेदपुर में यह मात्र 7-8 प्रतिशत (3,855 यूनिट) है। इसके अलावा, रेड क्रॉस सोसायटी द्वारा भी वर्ष 2025-26 में 63 शिविरों और एसडीपी (SDP) के माध्यम से 7,184 यूनिट स्वैच्छिक रक्तदान कराया गया है।
पूर्व संध्या पर रक्तदाताओं ने किया एसडीपी डोनेशन
विश्व रक्तदाता दिवस की पूर्व संध्या (13 जून) पर भी शहर के रक्तदाताओं ने अद्भुत समर्पण का प्रदर्शन किया। जमशेदपुर ब्लड सेंटर में रेड क्रॉस के एसडीपी डोनेशन प्रभारी प्रभुनाथ सिंह की देखरेख में टाटा स्टील कर्मी राजु कुमार ने 46वीं बार, दिनेश कुमार सिंह ने 28वीं बार और जोरावर सिंह गबरी ने चौथी बार एसडीपी डोनेशन किया। प्रभुनाथ सिंह ने इन सभी महान रक्तदाताओं को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया और उनका हौसला बढ़ाया।
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युवाओं और महिलाओं से रक्तदान अभियान से जुड़ने की अपील
रक्तदान के क्षेत्र में इतना शानदार काम होने के बावजूद, महिलाओं की भागीदारी अभी भी 2-3 प्रतिशत के बीच ही है, जिसे बढ़ाने के लिए नए प्रयासों की आवश्यकता है। रेड क्रॉस के उप सचिव श्याम कुमार प्रसाद ने बताया कि शहर में लगभग 6 लाख योग्य लोग ऐसे हैं, जिन्होंने स्वस्थ होने के बावजूद अब तक रक्तदान नहीं किया है। यदि शहर के 18 वर्ष से ऊपर के केवल 10 हजार युवा हर साल इस महाअभियान से जुड़ जाएं, तो भविष्य में रिप्लेसमेंट डोनेशन की आवश्यकता ही समाप्त हो जाएगी। आज का दिन युवाओं को इस पावन अभियान से जुड़ने और जीवनदान का संकल्प लेने का एक बेहतरीन अवसर है।



