
जमशेदपुर। शहर के गांधी घाट के समीप स्थित छोटे बच्चों के दफन स्थल की बदहाल स्थिति को सुधारने के लिए एक सकारात्मक पहल शुरू हुई है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सौरभ विष्णु ने विरोध की राजनीति के बजाय समाधान की राह चुनी। लंबे समय से इस विषय को सोशल मीडिया पर उठाने, प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखने और टाटा प्रबंधन के साथ लगातार संवाद करने के बाद अब उनके प्रयासों का जमीनी असर दिखाई देने लगा है।

टाटा स्टील और टाटा फाउंडेशन की टीम ने किया निरीक्षण
मंगलवार को सौरभ विष्णु के साथ टाटा स्टील कॉरपोरेट कार्यालय और टाटा फाउंडेशन के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय टीम ने गांधी घाट के पास स्थित बच्चों के दफन स्थल का संयुक्त निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्थल की वर्तमान बदहाली का जायजा लिया और वहां मौजूद चहारदीवारी, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से सुना। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सकारात्मक संकेत दिए कि टाटा स्टील की ओर से इस स्थान को पूरी तरह से विकसित किया जाएगा, जो शहरवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण और भावनात्मक रूप से जुड़ा उपहार होगा।
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सशक्त लोकतंत्र में विरोध और सहयोग दोनों जरूरी: सौरभ विष्णु
टाटा स्टील के साथ मिलकर काम करने के फैसले पर सौरभ विष्णु ने अपने लोकतांत्रिक विचारों को खुलकर साझा किया। उन्होंने कहा:
“यह लोकतंत्र है। यहाँ सामने वाला व्यक्ति, संस्था या कोई बड़ा कॉरपोरेट कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, यदि वह जनहित की अनदेखी करेगा तो उसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करना बनता है। एक स्वस्थ समाज में ऐसे विरोध की हमेशा जगह होनी चाहिए, यही सशक्त लोकतंत्र की निशानी है। मैंने हमेशा इसी सिद्धांत के तहत अपनी आवाज उठाई है।”
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि समाज और व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सभी पक्षों को समान रूप से सम्मान और स्वीकार्यता मिलनी चाहिए। आज इसी नीति के तहत वे जनहित के मुद्दे पर टाटा स्टील के साथ खड़े हैं, लेकिन वे अपने पुराने रुख पर आज भी कायम हैं।
जनहित सर्वोपरि: भविष्य में भी गलत का होगा विरोध
सौरभ विष्णु ने साफ तौर पर कहा कि उनका समर्थन किसी संस्था विशेष के लिए नहीं, बल्कि हमेशा जनता और जनहित के लिए रहेगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि भविष्य में टाटा स्टील का कोई भी कार्य जनहित के खिलाफ या गलत लगेगा, तो वे पहले की तरह ही पूरी मजबूती से उसका विरोध करेंगे। जहां गलत होगा वहां विरोध होगा, और जहां समाज के हित में काम होगा वहां उसका स्वागत किया जाएगा।
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परिवारों की भावनाओं और स्मृतियों के सम्मान का प्रश्न
मानगो बर्निंग घाट के समीप स्थित यह बाल दफ़न स्थल केवल एक जमीन के टुकड़े के विकास का मामला नहीं है। यह उन सैकड़ों परिवारों की भावनाओं और स्मृतियों के सम्मान का प्रश्न है, जिन्होंने अपने मासूम बच्चों को यहाँ अंतिम विदाई दी है। सौरभ विष्णु और टाटा प्रबंधन का साझा लक्ष्य अब इस स्थल को श्रद्धा, शांति और गरिमापूर्ण सम्मान का एक जीवंत प्रतीक बनाना है, ताकि शोक संतप्त परिवारों को यहाँ आकर कुछ पल सुकून के मिल सकें।


