जमशेदपुर.
शहर के साहित्यिक परिवेश को समृद्ध करने वाली वरिष्ठ महिला साहित्यकारों की संस्था “फुरसत में” ने अपने स्थापना के ग्यारहवें वर्ष को बड़े ही गरिमामय और आत्मीय माहौल में मनाया. यह आयोजन सोनारी स्थित वरिष्ठ साहित्यकार छाया प्रसाद के आवास पर काव्य सृजन, पारिवारिक मिलन और सम्मान समारोह के रूप में आयोजित किया गया.
संस्था की स्थापना और उद्देश्य
इस साहित्यिक समूह की स्थापना 5 अप्रैल 2015 को वरिष्ठ साहित्यकार आनंद बाला शर्मा ने की थी. तब से लेकर आज तक यह संस्था निरंतर साहित्य सृजन के माध्यम से हिंदी भाषा और साहित्य को समृद्ध करने का कार्य कर रही है. संस्था की विशेषता यह है कि इसकी सभी सदस्यगण बिना किसी वाद-विवाद या विचारधारा के बंधन के स्वतंत्र रूप से सृजन करती हैं और अपनी लेखनी को मां सरस्वती को समर्पित करती हैं.
सम्मान समारोह और ध्येय गीत की प्रस्तुति
कार्यक्रम में इस वर्ष संस्थापिका आनंद बाला शर्मा, संरक्षक छाया प्रसाद तथा डॉ. सरित किशोरी श्रीवास्तव को अध्यक्ष पद्मा मिश्रा एवं अन्य सदस्यों ने सम्मानित किया. इस अवसर पर छाया प्रसाद ने संस्था का ध्येय गीत “फुरसत के आंगन में” प्रस्तुत किया, जिसे वर्तमान अध्यक्ष पद्मा मिश्रा ने लिखा है. गीत की पंक्तियों ने पूरे वातावरण को भावनात्मक और साहित्यिक रंग में रंग दिया.
दीप प्रज्वलन और काव्य गोष्ठी की शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई. इसके बाद आरती श्रीवास्तव ने सरस्वती वंदना और सधे हुए मंच संचालन से कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावशाली बनाया. संस्था के ग्यारहवें स्थापना वर्ष की खुशी में केक काटा गया और फिर काव्य गोष्ठी का आरंभ हुआ.
काव्य पाठ में विविध भावों की अभिव्यक्ति
काव्य गोष्ठी में विभिन्न साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक, प्रकृति और नारी सशक्तिकरण जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया.
—माधुरी मिश्रा ने बेटियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया.
–आनंद बाला शर्मा ने बसंत ऋतु के आगमन का मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया.
–स्मिता मिश्रा ने प्रकृति से जीवन के गहरे दर्शन सीखने की प्रेरणा दी.
–पद्मा मिश्रा ने संघर्ष और आशा के भावों को अपनी रचनाओं में उकेरा.
-अनीता निधि की कविता में प्रकृति का कोमल और सौंदर्यपूर्ण रूप दिखाई दिया.
-डॉ. मनीला कुमारी ने नारी को आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का संदेश दिया.
-डॉ. मीनाक्षी कर्ण ने पलाश के फूलों के माध्यम से नारी सौंदर्य और गरिमा को व्यक्त किया.
-सरिता सिंह ने अंगिका भाषा में नारी विमर्श पर समाज के दोहरे मानदंडों को चुनौती दी.
-आरती श्रीवास्तव की मार्मिक रचना ने समाज की संवेदनहीनता को उजागर किया, जिसने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया.
-छाया प्रसाद ने यशोधरा की पीड़ा और भावनाओं का हृदयस्पर्शी चित्रण प्रस्तुत किया.
संस्था की उपलब्धियां और संदेश
संस्था की सदस्यगण न केवल सामूहिक रूप से सक्रिय हैं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर काव्य पाठ और पत्र-पत्रिकाओं में लेखन के माध्यम से हिंदी साहित्य को समृद्ध कर रही हैं.
केवल 18 सदस्यों का यह छोटा समूह अपनी सृजनात्मक ऊर्जा और समर्पण से एक बड़े साहित्यिक परिवार का रूप ले चुका है.
अध्यक्षीय वक्तव्य और भविष्य की दिशा
अध्यक्षीय वक्तव्य में आनंद बाला शर्मा ने कहा कि संस्था ने लंबा सफर तय किया है, लेकिन अभी आगे और भी मीलों चलना बाकी है. उन्होंने सभी को साथ मिलकर निरंतर सृजन करते रहने का संदेश दिया. वहीं डॉ. सरित किशोरी श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए संस्था को बरगद के वृक्ष की तरह मजबूत और विस्तृत बनाने की बात कही.
समापन और आगे का आह्वान
कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष पद्मा मिश्रा ने सभी सदस्यों को अगले वर्ष फिर इसी उत्साह और सृजनशीलता के साथ मिलने का आह्वान किया. सुमधुर जलपान के साथ यह वार्षिक आयोजन संपन्न हुआ, जो साहित्य, स्नेह और रचनात्मकता की अमिट यादें छोड़ गया.





