–राष्ट्रपति भवन में विकसित भारत फेलोशिप का गौरवपूर्ण समापन: झारखंड की उत्कर्षा सिन्हा ने बढ़ाया राज्य का मान
–देशभर के 5,000 से अधिक आवेदकों में से चुनी गईं केवल 40 फेलो में शामिल रहीं उत्कर्षा
नई दिल्ली/जमशेदपुर.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के विजन से प्रेरित होकर गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं को नीति-निर्माण और नीतिगत विमर्श से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित इस प्रतिष्ठित फेलोशिप ‘विकसित भारत फेलोशिप’ का राष्ट्रपति भवन में भव्य और गौरवपूर्ण समापन हुआ. देशभर से प्राप्त 5,000 से अधिक आवेदनों में से बहुस्तरीय चयन प्रक्रिया के तहत केवल 40 मेधावी फेलो का चयन किया गया था, जिसमें बहुविकल्पीय प्रश्न, निबंध लेखन और साक्षात्कार के कड़े चरण शामिल थे. इस राष्ट्रव्यापी पहल के अंतर्गत झारखंड के जमशेदपुर की रहने वाली उत्कर्षा सिन्हा ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए इस विशिष्ट फेलोशिप में अपनी जगह बनाई.
शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रेरणा लेती एक युवा नेत्री
उत्कर्षा सिन्हा ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा केरला समाजम मॉडल स्कूल, जमशेदपुर से पूरी की, जिसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से राजनीति विज्ञान में स्नातक (ऑनर्स) और एमिटी विश्वविद्यालय, नोएडा से लोक प्रशासन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की. उनकी इस सफलता के पीछे उनके परिवार का अटूट विश्वास और सहयोग रहा है. उनके पिता संजू आनंद एक सफल व्यवसायी हैं और माँ उपासना सिन्हा एक प्रतिष्ठित कवयित्री हैं. वहीं दीदी आकांक्षा व जीजाजी विनीत उनकी मुख्य ताकत हैं.
नीति-निर्माण और गणमान्य हस्तियों के साथ संवाद का अनूठा अनुभव
फेलोशिप के दौरान उत्कर्षा को महाराष्ट्र के नांदेड़ क्षेत्र से राज्यसभा सांसद डॉ. अजीत माधवराव गोपछड़े के साथ कार्य करने का अत्यंत ज्ञानवर्धक अवसर मिला. इस शोध कार्य के क्रम में उन्हें विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और उपराष्ट्रपति सहित देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियों से संवाद करने का मौका मिला, जिससे उन्हें देश की नीतिगत प्राथमिकताओं और शासन व्यवस्था को गहराई से समझने की प्रेरणा मिली.
राष्ट्रसेवा और जनहित के प्रति अटूट संकल्प
राष्ट्रपति भवन में महामहिम राष्ट्रपति महोदया से मुलाकात के साथ इस गौरवपूर्ण यात्रा का समापन हुआ, जो उत्कर्षा के लिए बेहद भावुक और अविस्मरणीय क्षण रहा. उनका मानना है कि राष्ट्रसेवा के लिए केवल एक ही मार्ग होना आवश्यक नहीं है और सिविल सेवा परीक्षा उनके लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम अवश्य है, परंतु यह देश सेवा का एकमात्र जरिया नहीं है. “यदि आकाश तक पहुँचना संभव न हो, तो अपनी छत बनाकर आगे बढ़ना चाहिए” के विचार को जीने वाली उत्कर्षा का मुख्य लक्ष्य अपनी क्षमता और ज्ञान का उपयोग कर देश और समाज के हित में निरंतर योगदान देना है.


