जमशेदपुर.
पृथ्वी दिवस के अवसर पर डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन के इको क्लब की ओर से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से संस्थान के मल्टीपरपस हाॅल में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इस अवसर पर शहर के सात प्रतिष्ठित महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने विचारों एवं प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया.
नाटक और वाद-विवाद प्रतियोगिता रहे मुख्य आकर्षण
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कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नाटक एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता रही. नाटक प्रतियोगिता में छात्रों ने प्रकृति संरक्षण, प्रदूषण और मानव जीवन के संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. छात्र-छात्राओं ने केरल, उत्तराखंड और अन्य इलाकों में आई प्राकृतिक विपदाओं व उसके मीडिया कवरेज, भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की व्यथा और दक्षिण भारत के एक इलाके में जंगल को उजाड़ने की कोशिश और जनता के आगे बढ़कर उसे बचाने को बेहद मार्मिकता और रचनात्मकता के साथ प्रस्तुत कर निर्णायकों और उपस्थित लोगों के दिल जीत लिए. इसके अलावा पर्यावरण संरक्षण को लेकर देश में चल रहे अन्य आंदोलनों को भी विद्यार्थियों ने बखूबी दिखाया.
वहीं वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान पर तार्किक एवं सार्थक विचार रखे.
निर्णायकों ने दिया जागरूकता का संदेश
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प्रतियोगिताओं में निर्णायक की भूमिका वरिष्ठ पत्रकार सह लेखिका अन्नी अमृता एवं साहित्य को समर्पित संस्था ‘निनाद’ की संस्थापक पूनम महानंद ने निभाई. अन्नी अमृता ने अपने संबोधन में कहा कि लोगों को जमशेदपुर के आस-पास के गांवों में जाकर देखना चाहिए, जहां बिना म्युनिसिपालिटी और मेयर के भी लोग स्वच्छता बनाए रखते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि भोपाल गैस त्रासदी के बाद भारत सरकार बीमा एक्ट 1991 लेकर आई थी, मगर जमशेदपुर के लोगों का बीमा नहीं हुआ था. मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा के आवाज उठाने पर तत्कालीन डीसी अमित कुमार की पहल पर टाटा स्टील ने 2018 में शहरवासियों का बीमा किया.वहीं पूनम महानंद ने छात्रों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि आज के औद्योगिक दौर में प्रकृति की रक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता है. उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश लिए एक खूबसूरत कविता भी सुनाई जिसे सुनकर पूरा हाॅल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा.
प्राचार्या व उप-प्राचार्या ने दिलाया संकल्प
कॉलेज की प्राचार्या डॉ. जूही समर्पिता ने पृथ्वी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह दिन हमें प्रकृति की रक्षा के लिए पुनः संकल्पित होने का अवसर देता है. उन्होंने चेताया कि यदि हम पृथ्वी को नहीं बचा पाए, तो हमारा और आने वाली पीढ़ियों का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.
उप-प्राचार्या डॉ. मोनिका उप्पल ने प्रकृति के पांच तत्व—धरती, जल, अग्नि, वायु और आकाश—का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी हमें जीवन प्रदान करते हैं, इसलिए इनके संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास करना हमारा कर्तव्य है.
प्राचार्या और उप-प्राचार्या के आह्वान पर सबने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी अपनी जिम्मेदारी निभाने का संकल्प लिया.
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प्रतियोगिताओं के परिणाम
प्रकृति संरक्षण पर आधारित नाटक प्रतियोगिता में अंजलि कुमारी, अर्तिका ज्योति, तनिष्का यादव, गुरिया कुमारी, नवनीत कौर और ईशा कुमारी की टीम ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. द्वितीय स्थान अदिति कुमारी, आकांक्षा दास, मुस्कान छाबरा, निशा भट्टाचार्जी और सुप्रीति दास की टीम को मिला, जबकि तृतीय स्थान नेहा मित्तल, निकिता तिर्की, अंजलि मंडल, तनुश्री दास, मौमिता चक्रबर्ती सेन और प्रियंका पोद्दार की टीम को प्राप्त हुआ.
वाद-विवाद प्रतियोगिता में रंभा कॉलेज ऑफ एजुकेशन की टीम प्रथम और डी.बी.एम.एस. कॉलेज ऑफ एजुकेशन की टीम द्वितीय स्थान पर रही. श्रेष्ठ वक्ता के रूप में नित्या झा (रंभा कॉलेज) को प्रथम और प्रियंका तिवारी (ग्रेजुएट कॉलेज) को द्वितीय स्थान मिला.
इको क्लब के मार्गदर्शन में सफल आयोजन
पूरा कार्यक्रम कॉलेज की शिक्षिका एवं इको क्लब की इंचार्ज मौसमी दत्ता के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ. इस अवसर पर कॉलेज की सचिव श्रीप्रिया धर्मराजन, सह-सचिव सुधा दिलीप सहित सभी शिक्षिकाएं और कर्मचारी उपस्थित रहे.
कार्यक्रम को लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों ने महसूस किया कि इस आयोजन ने न केवल छात्रों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाई, बल्कि उन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया.






