जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में कुष्ठ रोग की समय पर पहचान, उपचार और संक्रमण की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान तेज कर दिया है। इसी क्रम में चेन्नई स्थित सीएलटीआरआई (CLTRI) की मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी एवं केंद्रीय मॉनिटर डॉ. होसान्ना सिंह ने जिले में संचालित कुष्ठ रोग खोज अभियान और ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ (MDT) अभियान का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान उन्होंने विशेष रूप से बच्चों में कुष्ठ रोग की रोकथाम, मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों की पहचान और पात्र व्यक्तियों को चिकित्सकीय दिशानिर्देशों के अनुसार सिंगल डोज रिफाम्पिसिन देने पर जोर दिया।
बच्चों में कुष्ठ रोग की रोकथाम के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग जरूरी
डॉ. होसान्ना सिंह ने कहा कि कुष्ठ रोग के प्रसार को रोकने के लिए पंजीकृत मरीजों के परिवार और निकट संपर्क में रहने वाले व्यक्तियों की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।
उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
जांच के बाद निर्धारित चिकित्सकीय मानदंडों के अनुसार पात्र संपर्कों को सिंगल डोज रिफाम्पिसिन (SDR) देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
यह दवा कुष्ठ रोग से संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए पात्र लोगों में रोग विकसित होने के जोखिम को कम करने के लिए दी जाती है। इसे देने से पहले आवश्यक चिकित्सकीय जांच और पात्रता का आकलन जरूरी है।
हुरलुंग आयुष्मान आरोग्य मंदिर का किया निरीक्षण
केंद्रीय मॉनिटर डॉ. होसान्ना सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुगसलाई के अंतर्गत आयुष्मान आरोग्य मंदिर, हुरलुंग का निरीक्षण किया।
इस दौरान जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी सह जुगसलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. मृत्युंजय धावड़िया ने डॉ. होसान्ना सिंह और डॉ. गौतम कुमार का पौधा भेंट कर स्वागत किया।
इसके बाद डॉ. सिंह ने सहियाओं द्वारा चिह्नित किए गए संदिग्ध कुष्ठ रोगियों की स्क्रीनिंग की और अभियान की प्रगति की जानकारी प्राप्त की।
सहिया घर-घर जाकर खोजेंगी संदिग्ध कुष्ठ मरीज
जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने बताया कि पूर्वी सिंहभूम जिले में 10 अक्टूबर 2026 से 30 जनवरी 2027 तक ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ अभियान संचालित किया जा रहा है।
अभियान के तहत सहिया घर-घर जाकर कुष्ठ रोग के संभावित लक्षण वाले व्यक्तियों की पहचान करेंगी और उन्हें जांच के लिए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजेंगी।
इसका उद्देश्य ऐसे मरीजों की समय रहते पहचान करना है, जो जानकारी के अभाव या सामाजिक संकोच के कारण जांच और उपचार तक नहीं पहुंच पाते।
आंगनबाड़ी कर्मियों और शिक्षकों को भी किया जाएगा जागरूक
अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा और महिला एवं बाल विकास से जुड़े कर्मियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की जाएगी।
डॉ. राजीव लोचन महतो ने बताया कि सभी आंगनबाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं को कुष्ठ रोग के लक्षण, उपचार और इससे जुड़ी भ्रांतियों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
इसके अलावा विद्यालयों से एक पुरुष शिक्षक और एक महिला शिक्षिका को भी जागरूक किया जाएगा, ताकि बच्चों और अभिभावकों तक सही जानकारी पहुंच सके।
कुष्ठ रोग का इलाज उपलब्ध है और समय पर उपचार शुरू होने से इससे होने वाली दिव्यांगता के जोखिम को कम किया जा सकता है।
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सभी विभागों को समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश
जिला कुष्ठ निवारण पदाधिकारी डॉ. मृत्युंजय धावड़िया ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान को प्रभावी बनाने का निर्देश दिया।
उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों से संदिग्ध मरीजों की पहचान, जांच और उपचार से संबंधित गतिविधियों को प्राथमिकता देने को कहा।
निरीक्षण कार्यक्रम में जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो, डेमियन फाउंडेशन के राज्य समन्वयक डॉ. गौतम कुमार, दुर्योधन बागती, पीएमडब्ल्यू संगीता चाकी, सीएचओ नम्रता कुमारी, आयुष सीएचओ प्रेरणा कुमारी तथा सहिया कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।


