जमशेदपुर.
इग्नू क्षेत्रीय केंद्र, रांची के तत्वावधान में जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में बी.एड. द्वितीय वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए 15 अक्टूबर से 27 अक्टूबर तक आयोजित 12 दिवसीय विशेष कार्यशाला का सफलतापूर्वक समापन हो गया है. यह महत्वपूर्ण शैक्षणिक आयोजन विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. इला कुमार के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से संपन्न हुआ.
इस कार्यशाला में देश के विभिन्न प्रांतों से बी.एड. के छात्र-छात्राएं शामिल हुए. यहां प्रतिभागियों ने आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, शिक्षण कौशलों और कक्षा प्रबंधन की व्यावहारिक बारीकियों को गहराई से सीखा.
विशेष सत्र और गतिविधियां
कार्यशाला के दौरान विभिन्न दिनों में शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए. इनमें प्रमुख रूप से ‘पाठ्यक्रम का संदर्भीकरण’, ‘स्वयं की समझ’, ‘पाठ्यक्रम विश्लेषण’, ‘मूल्यांकन कैसे करें’ और ‘विशेष आवश्यकता वाले बच्चे’ जैसे विषय शामिल रहे. इसके अतिरिक्त, व्यावहारिक अनुभव और जानकारी बढ़ाने के उद्देश्य से एक दिन छात्र-छात्राओं के लिए नगर भ्रमण का भी आयोजन किया गया, जिससे उन्हें क्षेत्र की सांस्कृतिक और व्यावहारिक समझ प्राप्त हुई.
कुशल संचालन एवं समन्वयक की सराहनीय भूमिका
कार्यक्रम का सुचारू संचालन एवं प्रबंधन समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा तथा सह-समन्वयक डॉ. विजेता कुमारी की देखरेख में किया गया. इस कार्यशाला की सफलता में समन्वयक डॉ. त्रिपुरा झा की भूमिका अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक रही. उन्होंने न केवल पूरी कार्यशाला का उत्कृष्ट और सुव्यवस्थित संयोजन किया, बल्कि प्रत्येक छात्र-छात्रा से संवाद स्थापित कर उनका निरंतर मार्गदर्शन किया. उनकी सहयोगात्मक और मिलनसार शैली ने हर पल विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाया और उनमें एक नई ऊर्जा व आत्मविश्वास का संचार किया.
विशेषज्ञों का मिला मार्गदर्शन
कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में झारखंड के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों व विषय विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए. प्रमुख संसाधन सेवियों के रूप में डॉ. मोनिका उप्पल, डॉ. अरुणिमा कुमारी, डॉ. अर्पित सुमन, डॉ. मनीषा कुमारी, डॉ. संजय भुइयां, डॉ. सुचेता भुइयां, डॉ. सुचित्रा बहेरा और डॉ. गीता महतो समेत कई अन्य विद्वानों ने सत्रों का संचालन कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया.
यह 12 दिवसीय कार्यशाला छात्र-छात्राओं के पेशेवर और शैक्षणिक विकास में एक मील का पत्थर साबित हुई है, जो भविष्य में उन्हें एक कुशल और संवेदनशील शिक्षक के रूप में तैयार करने में अत्यंत सहायक सिद्ध होगी.


