
जमशेदपुर.

लगातार बढ़ती आबादी और शहरीकरण को देखते हुए जमशेदपुर, आदित्यपुर, मानगो, जुगसलाई एवं आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर संविधान के तहत ‘मेट्रो क्षेत्र’ (Metropolitan Area) घोषित करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है. इस संबंध में मानवाधिकार कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने झारखंड के माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को प्रेस रिलीज के माध्यम से एक स्मार पत्र भेजकर 22 वर्ष पुराने लंबित प्रस्ताव पर तत्काल निर्णय लेने का आग्रह किया है.
22 साल पहले तत्कालीन उपायुक्त ने भेजा था प्रस्ताव
मुख्यमंत्री के नाम पत्र में उल्लेख किया गया है कि आज से करीब 22 वर्ष पूर्व जमशेदपुर के तत्कालीन उपायुक्त (DC) सुनील कुमार वर्णवाल ने शहर की बढ़ती जनसंख्या और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए इसे मेट्रो क्षेत्र बनाने की विस्तृत योजना तैयार की थी. जिला प्रशासन द्वारा गहन अध्ययन के बाद इस अनुशंसा को तत्कालीन राज्य सरकार के नगर विकास विभाग को भेजा गया था, जो कि पिछले 22 वर्षों से लंबित (पेंडिंग) है.
क्या है संविधान के तहत ‘मेट्रो क्षेत्र’ का प्रावधान?
अधिवक्ता और विशेषज्ञों के अनुसार, संवैधानिक प्रावधानों के तहत मेट्रो क्षेत्र वह होता है जहाँ:
आबादी का घनत्व अधिक हो और एक से अधिक नगर निकाय (जैसे- नगर निगम, नगर परिषद या अधिसूचित क्षेत्र समिति) क्रियाशील हों.
यदि क्षेत्र दो अलग-अलग जिलों (जैसे पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) में भी बंटा हो, तब भी उन्हें मिलाकर एक मेट्रो क्षेत्र बनाया जा सकता है.
मेट्रो क्षेत्र बनने से होने वाले मुख्य लाभ
1. मेट्रो डेवलपमेंट अथॉरिटी का गठन: पूरे क्षेत्र के एकीकृत और सुव्यवस्थित विकास के लिए एक विशेष ‘मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी’ का गठन होगा.
2. अरबों रुपयों का केंद्रीय और वैश्विक फंड: मेट्रो क्षेत्र घोषित होने के बाद शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर, फ्लाईओवर, ट्रांसपोर्ट और आधुनिक सुविधाओं के लिए केंद्र सरकार तथा विश्व बैंक (World Bank) से अरबों रुपयों का फंड मिलना आसान हो जाएगा.
3. मूलभूत सुविधाओं का विस्तार: सुप्रीम कोर्ट के दबाव के बाद टाटा स्टील द्वारा मानगो और जुगसलाई जैसे क्षेत्रों में पानी, बिजली और साफ-सफाई की सुविधा देने की घोषणा की जा चुकी है. मेट्रो क्षेत्र बनने से इन सुविधाओं का दायरा और मजबूत होगा.
ऐतिहासिक दस्तावेजों का दिया हवाला
जवाहरलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र के साथ 30 नवंबर 2004 के समाचार पत्र ‘प्रभात खबर’ के मुख्य पृष्ठ पर छपे तमाम संवैधानिक प्रावधानों और जनता को मिलने वाले लाभों की विस्तृत रिपोर्ट को दस्तावेज के रूप में संलग्न किया है. उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में भी उनके द्वारा सौंपे गए स्मार पत्र के आधार पर ही जिला प्रशासन ने इसका अध्ययन कर सरकार को फाइल बढ़ाई थी.
मुख्यमंत्री से त्वरित कार्रवाई की अपील
पत्र के अंत में मानवाधिकार कार्यकर्ता ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पुरजोर अपील की है कि जमशेदपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए राजनीति से ऊपर उठकर इस ऐतिहासिक प्रस्ताव पर तत्काल मुहर लगाई जाए और जमशेदपुर को आधिकारिक तौर पर ‘मेट्रो क्षेत्र’ घोषित किया जाए.


