
जमशेदपुर। शहर के कदमा मेन रोड स्थित प्रतिष्ठित श्री श्री रंकिणी मंदिर में विपतारणी देवी की पूजा अत्यंत हर्षोल्लास और भक्ति-भाव के साथ संपन्न हुई। इस पावन अवसर पर मंदिर प्रांगण में हजारों की संख्या में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। आस्था के इस महापर्व में शामिल होकर श्रद्धालुओं ने देवी से अपने परिवार की सुख, शांति, समृद्धि और संकटों से रक्षा की मंगल कामना की।
विपतारणी देवी की महिमा और धार्मिक मान्यता
रंकिणी मंदिर के महासचिव जनार्दन पाण्डेय और अध्यक्ष दिलीप दास ने इस पर्व के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि विपतारणी देवी साक्षात मां दुर्गा का ही एक शक्तिशाली स्वरूप हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त सच्चे मन से विपतारणी देवी की पूजा-अर्चना करता है, मां की कृपा से उस पर पूरे वर्ष कोई संकट या विपत्ति नहीं आती। इस विशेष पूजा में मुख्य रूप से बंगाली समुदाय की महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं।
उपवास और लाल धागा बांधने की अनूठी परंपरा
इस पर्व की अपनी एक अनूठी और गहरी परंपरा है। पूजा के दिन महिलाएं कठिन उपवास रखती हैं और मंदिर में सामूहिक रूप से बैठकर मां विपतारणी की पावन कथा सुनती हैं। कथा संपन्न होने के बाद संकटमोचक रक्षा सूत्र के रूप में लाल धागा बांधा जाता है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं यह लाल धागा अपने बाएं हाथ में और पुरुष अपने दाएं हाथ में बांधते हैं। माना जाता है कि यह पवित्र धागा विपत्तियों से रक्षा करने वाला एक मजबूत कवच है।
मंदिर समिति का रहा महत्वपूर्ण योगदान
इतने बड़े स्तर पर श्रद्धालुओं की भीड़ को व्यवस्थित करने और पूजा का सफल आयोजन करने में मंदिर समिति के सदस्यों की कड़ी मेहनत का परिणाम रहा। इस भव्य अनुष्ठान को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में मंदिर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष के.जी. गोविन्द, एस. रमेश, दीपक विश्वास, हरभजन सिंह, संजय कुमार, सुभाष, एस.के. वर्मा, कार्तिक, गोपाल, मनिन्दर सिंह और बालक दा सहित सभी वरिष्ठ एवं कनिष्ठ सदस्यों ने अपना बहुमूल्य योगदान दिया। पूरे दिन मंदिर परिसर देवी के जयकारों से गुंजायमान रहा।




