जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम जिले में कुष्ठ रोग को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य विभाग का अभियान जारी है। इसी क्रम में 26 अक्टूबर को ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ (एमडीटी) 100 दिवसीय कुष्ठ जागरूकता अभियान के 12वें दिन पोटका प्रखंड की बांगों पंचायत स्थित बीरबाद गांव में रात्रि चौपाल आयोजित की गई।
इस दौरान स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को बताया कि कुष्ठ रोग न तो कोई अभिशाप है और न ही पिछले जन्म के पाप का परिणाम। यह बैक्टीरिया से होने वाली बीमारी है, जिसका समय पर उपचार शुरू करने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है और दिव्यांगता के जोखिम को कम किया जा सकता है।
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शरीर पर सुन्न दाग दिखे तो तुरंत कराएं जांच
सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल के निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में जिला कुष्ठ परामर्शी डॉ. राजीव लोचन महतो ने ‘मेरी दोस्ती तुमसे’ अभियान की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि अभियान के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में कुष्ठ रोग की पहचान, उपचार और इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
डेमियन फाउंडेशन के राज्य समन्वयक डॉ. गौतम कुमार ने बताया कि शरीर पर ऐसे दाग, जिनमें संवेदना कम हो या सुन्नपन महसूस हो, कुष्ठ रोग के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच करानी चाहिए।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कुष्ठ रोग का मुफ्त इलाज
चेन्नई से आए डॉ. होसान्ना सिंह ने ग्रामीणों को बताया कि कुष्ठ रोग एक जीवाणुजनित बीमारी है। इसका इलाज मल्टी ड्रग थेरेपी (MDT) के माध्यम से किया जाता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग को लेकर समाज में फैली गलत धारणाओं को समाप्त करना जरूरी है। मरीजों के साथ भेदभाव करने के बजाय उन्हें समय पर जांच और उपचार के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में कुष्ठ रोग की दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं। बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान और इलाज से नसों को होने वाली क्षति तथा दिव्यांगता के खतरे को कम किया जा सकता है।
दिव्यांगता से बचाव और सेल्फ केयर की दी जानकारी
डेमियन फाउंडेशन के दुर्योधन बागती ने कुष्ठ रोग से जुड़ी भ्रांतियों और इसके कारण होने वाली दिव्यांगता के विषय में जानकारी दी।
एमपीडब्ल्यू तुषार मंडल ने प्रभावित अंगों की देखभाल यानी सेल्फ केयर का महत्व समझाया। उन्होंने बताया कि कुछ मरीजों में कुष्ठ रोग के कारण उत्पन्न विकृतियों को सुधारने के लिए रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी की मदद ली जा सकती है।
वहीं एमपीडब्ल्यू पलास मंडल ने सहियाओं को कुष्ठ विभाग की ओर से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि और संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी।
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ग्रामीणों और सहियाओं ने निभाई सक्रिय भूमिका
बीरबाद गांव में आयोजित रात्रि चौपाल को सफल बनाने में वार्ड सदस्य बिजो बासके, पोटका के एमपीडब्ल्यू उपेंद्रनाथ मोदिना, संजय सरदार, देवाशीष भगत, पलास मंडल, दीपांकर, तुषार मंडल और लैब टेक्नीशियन अंबुज गोप ने सहयोग किया।
कार्यक्रम में स्थानीय सहियाओं और ग्रामीणों ने भी भाग लिया। स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीणों से अपील की कि कुष्ठ रोग के संदिग्ध लक्षण दिखाई देने पर बीमारी को छिपाने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय जांच कराएं।


