जमशेदपुर/रांची: बधिर (Deaf) और कम सुनने वाले लोगों के समाज और कार्यस्थल में समावेशन (Inclusion) को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी पहल की गई है। टाटा स्टील फाउंडेशन (TSF), इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (ISLRTC), और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन कंपोजिट रीजनल सेंटर (CRC), रांची ने एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस महत्वपूर्ण साझेदारी के तहत तीनों संस्थान ‘सबल-संकेत’ (Sabal-Sanket) पहल के लिए मिलकर काम करेंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) के इस्तेमाल को जन-जन तक पहुंचाना और संवाद की बाधाओं को दूर करना है।
TSF के 10 मास्टर ट्रेनर्स को मिलेगा ISL का विशेष प्रशिक्षण
इस समझौते के तहत, टाटा स्टील फाउंडेशन के 10 मास्टर ट्रेनर्स को भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) का विशेष प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र दिया जाएगा।
समावेशी माहौल: ये प्रशिक्षित ट्रेनर एक टीम के रूप में काम करेंगे और जागरूकता फैलाने के साथ-साथ दूसरों को प्रशिक्षित कर बधिरजनों के लिए एक समावेशी माहौल तैयार करेंगे।
कार्यस्थल पर प्रशिक्षण: ‘सबल-संकेत’ के तहत TSF के कर्मचारियों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, ताकि वे सांकेतिक भाषा की बुनियादी जानकारी और बधिरजनों की संस्कृति को समझ सकें।
‘समावेशन की शुरुआत संवाद से होती है’: सौरव रॉय
इस अवसर पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर ISLRTC के निदेशक राजू, CRC रांची के निदेशक सूर्यमणि प्रसाद और टाटा स्टील फाउंडेशन के सीईओ सौरव रॉय ने हस्ताक्षर किए।
सौरव रॉय ने कहा, “समावेशन की शुरुआत संवाद (Communication) से होती है। ISLRTC और CRC रांची के साथ हमारी साझेदारी ऐसा माहौल बनाने की दिशा में एक कदम है, जहाँ बधिर और कम सुनने वाले लोग सम्मान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता के साथ समाज में भाग ले सकें।”
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तैयार किया जाएगा लर्निंग मॉड्यूल
इस पहल को व्यापक रूप देने के लिए तीनों संस्थान मिलकर सीखने-सिखाने के मॉड्यूल और सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री भी तैयार करेंगे। इस मौके पर स्किल डेवलपमेंट, सबल एंड स्पोर्ट्स के हेड अमिताभ भी उपस्थित थे। यह साझेदारी दिव्यांगजनों को समान अवसर और सम्मान दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।


