जमशेदपुर,: पूर्वी सिंहभूम जिले में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला स्वास्थ्य समिति और टाटा स्टील फाउंडेशन के मानसी+ कार्यक्रम के संयुक्त प्रयासों से जिले के 31 प्रसव केंद्रों में कार्यरत 79 स्वास्थ्यकर्मियों को सुरक्षित प्रसव और नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
इस बीच जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में नवजात शिशुओं की मृत्यु से संबंधित एक महत्वपूर्ण आंकड़ा भी सामने आया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में ग्रामीण पूर्वी सिंहभूम में दर्ज नवजात शिशु मृत्यु की संख्या पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 26 प्रतिशत कम रही।
दो बैचों में 79 ANM, GNM और CHO को मिला प्रशिक्षण
वित्तीय वर्ष 2026-27 की संयुक्त कार्ययोजना (Joint Action Plan) के तहत तीन दिवसीय पुनश्चर्या प्रशिक्षण दो बैचों में आयोजित किया गया।
पहला बैच 22 से 24 अक्टूबर और दूसरा बैच 26 से 28 अक्टूबर 2026 तक चला।
इस दौरान जिले के सभी 31 प्रसव केंद्रों से जुड़े कुल 79 एएनएम (ANM), जीएनएम (GNM) और सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (CHO) ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।
प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को प्रसव के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिल परिस्थितियों से निपटने और माताओं तथा नवजात शिशुओं की जान बचाने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना था।
प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव रोकने पर विशेष जोर
प्रशिक्षण में प्रसव के तृतीय चरण के सक्रिय प्रबंधन (AMTSL) पर विशेष ध्यान दिया गया। इसका उद्देश्य प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव जैसी गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करना है।
स्वास्थ्यकर्मियों को नवजात शिशु पुनर्जीवन (Newborn Resuscitation), प्रसवोत्तर रक्तस्राव (PPH) की रोकथाम और प्रबंधन, प्री-एक्लेम्पसिया तथा एक्लेम्पसिया की पहचान और उपचार संबंधी आवश्यक जानकारी दी गई।
इसके अलावा सुरक्षित प्रसव, प्रसव संबंधी आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने और जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु की देखभाल से जुड़े जीवनरक्षक कौशलों का अभ्यास कराया गया।
ग्रामीण पूर्वी सिंहभूम में नवजात मृत्यु के मामलों में 26 प्रतिशत गिरावट
जिला स्वास्थ्य समिति और मानसी+ कार्यक्रम के समन्वित प्रयासों के बीच ग्रामीण पूर्वी सिंहभूम में नवजात शिशु मृत्यु के दर्ज मामलों में कमी सामने आई है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में यह संख्या पिछले वित्तीय वर्ष की समान अवधि की तुलना में 26 प्रतिशत कम रही।
इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाने और आपातकालीन प्रसूति सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
हालांकि, जारी आंकड़ा नवजात मृत्यु की दर्ज संख्या में कमी दर्शाता है। नवजात मृत्यु दर का आकलन करने के लिए जीवित जन्मों की संख्या सहित अन्य आंकड़ों की भी आवश्यकता होती है।
सभी 31 प्रसव केंद्रों की होगी मासिक निगरानी
प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करने के लिए जिले के सभी 31 प्रसव केंद्रों की नियमित मासिक निगरानी की जाएगी।
इस दौरान संस्थागत प्रसव की संख्या, गंभीर मामलों के रेफरल, प्रसव संबंधी जटिलताओं के प्रबंधन तथा मातृ एवं नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य परिणामों की समीक्षा की जाएगी।
इस व्यवस्था का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद कमियों की पहचान करना और समय रहते आवश्यक सुधार सुनिश्चित करना है।
सिविल सर्जन और चिकित्सा पदाधिकारियों की निगरानी में कार्ययोजना
संयुक्त कार्ययोजना का क्रियान्वयन जिला स्तर पर सिविल सर्जन और जिला प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य पदाधिकारी (DRCHO) के नेतृत्व में किया जा रहा है।
वहीं प्रखंड स्तर पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) के मार्गदर्शन में एएनएम, सीएचओ, सहिया, सहिया साथी और मानसी मित्र मिलकर कार्य कर रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. विशाल चंद्र, हरिहर मोदिना, राहुल कुमार और मनी मार्डी का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
जिला स्वास्थ्य समिति और टाटा स्टील फाउंडेशन की इस संयुक्त पहल का लक्ष्य रोकी जा सकने वाली मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु की घटनाओं में और कमी लाना है।

