
जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिले के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से जारी हाथी-मानव संघर्ष को थामने के लिए वन विभाग ने एक बेहद आधुनिक और तकनीकी कदम उठाया है। हाथियों के उत्पात से जान-माल और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जा रही है। वन विभाग द्वारा इन क्षेत्रों में कुल 26 अत्याधुनिक एआई कैमरे स्थापित करने की पहल शुरू कर दी गई है।

इन क्षेत्रों में शुरू हुआ कैमरे लगाने का काम
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, कैमरे लगाने का काम धरातल पर शुरू हो चुका है। इसके तहत मुख्य रूप से चाकुलिया, चांडिल और दलमा वन क्षेत्र को कवर किया जा रहा है, जो हाथियों के मुख्य कॉरिडोर माने जाते हैं। चाकुलिया और चांडिल के इलाकों में हाथियों का उत्पात लंबे समय से एक गंभीर समस्या बना हुआ है, जिससे ग्रामीणों में हमेशा भय का माहौल रहता है।
24 घंटे निगरानी और ऑटोमैटिक सायरन अलर्ट
कैसे काम करेगी यह तकनीक: इन कैमरों के जरिए हाथियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे (24×7) पैनी नजर रखी जाएगी। जैसे ही कोई हाथी इन कैमरों की रेंज में आएगा, सिस्टम बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतः (Automatically) सक्रिय हो जाएगा। इसके सक्रिय होते ही इलाके में सायरन बजने लगेगा। साथ ही, वन विभाग के अधिकारियों और आसपास के ग्रामीणों के मोबाइल पर तत्काल अलर्ट व नोटिफिकेशन पहुंच जाएगा।
अंधेरे में भी हाथियों को पहचान लेगी एआई तकनीक
इन अत्याधुनिक कैमरों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये रात के घने अंधेरे में भी उतने ही प्रभावी ढंग से काम करेंगे जितने दिन में। थर्मल या इंफ्रारेड विजन और उन्नत एआई एल्गोरिदम के माध्यम से यह सिस्टम हाथियों की सटीक पहचान करने में सक्षम है। हाथियों के गांवों में प्रवेश करने से पहले ही अलर्ट मिलने से ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने और फसलों को बचाने का पर्याप्त समय मिल जाएगा।
40 फीट ऊंचे टावरों पर इंस्टॉल हो रहे हैं कैमरे
डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि हाथियों के मूवमेंट वाले रास्तों को चिन्हित कर वहां 40 फीट ऊंचे विशेष टावर बनाए जा रहे हैं, जिन पर इन कैमरों को इंस्टॉल किया जा रहा है। चाकुलिया प्रखंड के राजाबासा, जमुआ, माचाडीहा, कलसीमूंग, मोरबेडा और पूर्णापानी समेत कई संवेदनशील गांवों में ये कैमरे लगाए जा रहे हैं। वहीं, चांडिल के कुकड़ू, नीमडीह, कुसपुतुल और अंडा गांव के अलावा दलमा वाइल्डलाइफ सेंचुरी के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर भी इन्हें मुस्तैदी से लगाया जा रहा है। वन विभाग को पूरी उम्मीद है कि इस हाई-टेक कदम से क्षेत्र में मानव-हाथी द्वंद्व में भारी कमी आएगी।



