
जमशेदपुर।


विधानसभा चुनाव में सरयु राय से मिली हार के बाद रघुवर दास अपनी हार के कारणों की जानकारी लेने के लिए एग्रीकों सुर्यमंदीर में समीक्षा करने के लिए संमर्थकों के साथ बेठे. जमशेदपुर एयरपोर्ट से सीधा रधुवर दास सुर्यमंदीर पहुंचे जहां बैठक शुरु होते ही रघुवर दास के करीबियों पर हार का ठिकरा फोड़ते हुए कार्यकर्ताओ ने हंगाम खड़ा कर दिया. एक-दूसरे पर आरोप लगाने के दौरान दो कर्यकर्ताओ के बीच आपस में ही भीड़ गए और हाथपाई तक कर लिया. रघुवर दास और दुसरे नेताओं के बीच-बचाव से हाथापाई तो रुकी लेकिन विरोध के स्वर तेज होते चले गए. पुर्वी जमशेदपुर में सरयु को सेध लगाने में मिली कामयाबी बहस का मुख्य केंद्र रही.
रिशेतदार हार का मुख्य कारण-
परिवारवाद के खिलाफ बोलने वाले रघुवर दास पर उनके समर्थकों ने उन्ही पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया. परिवारवाद को हार का मुख्य कारण बताते हुए कार्यकर्ताओ ने कहा की बीते पाच साल में रघुवर दास के रिश्तेदार पार्टी के अंदर हावी हो गए. जिसके चलते कार्यकर्ताओ का मनोबल टुटा. नाम न लेने की स्थीती में यहां तक कहा की बैठक में एक कार्यकर्ता ने रघुवर दास से सववला करते हुए कहा की उनको अपने रिश्तेदार की संपत्ती का आंकलन करना चाहिए. कमलेश साहु, दिनेश साहु और मूलचंद साहु की पाच साल पहले की संपत्ती और आज की संपत्ती के बीच का फर्क आंकने की नसीहत भी दी. रिश्तेदारों पर स्वार्थहित में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा की सभी रिश्तेदारों ने पार्टी में पद हासिल किया टाटा स्टील में नौकरी ली लेकिन कार्यकर्ताओ से कभी सीधी जुवान से बात तक नहीं की.
कई लोगों को हटाने की उठी मांग-
हंगामेदार बैठक के बीच कार्यकर्ताओं ने सीधे तौर पर रामबाबु तिवारी, मनिंनदर चौधरी,.पवन अग्रवाल,जिला अध्यक्ष दिनेश साहु समेत कई लोगों को तुरंत पद से हटाने की माग रखी गई. सभी पर रघुवर दास को हमेशा मुगालते में रखने का आरोप भी लगाया गया जिसके चलते उन्हे कभी भी सही स्थीती का पता नहीं चल सका. सूत्रों की मानें तो बैठक में साफ तौर पर कहा गया की अगर ये लोग अभी भी रघुवर दास के साथ बने रहेंगे तो जल्द ही कई कार्यकर्ता सरयु के खेमें में शामिल हो जाएंगे.
क्या कहा रघुवर दास नें-
2 घंटे से ज्यादा की माथा-पच्ची के दौरान कई लोगों को रघुवर दास बैठक से जाने का आदेश भी देते रहे ताकि मसलों पर चर्चा शांती से हो सके. बेठक के बाद रघुवर दास बाहर आए और मीडिया से बात करते हुए हार के लिए उनके खिलाफ किए गए दुष्प्रचार को जिम्मेदार ठहराया. उनका कहना था की राज्य के विकास के लिए उन्होंने पांच साल जी-तोड़ मेहनत किया लेकिन फिर भी विरोधियों को उनके खिलाफ दुष्प्रचार करने में कामयाबी मिली. परिवारवाद को हार का कारण न मानते हुए रघुवर दास ने कहा की उनके कार्य़कर्ताओं को धमकी भरे कॉल किए जा रहे हैं उनको डराया-धमकाया जा रहा है ताकि वो रघुवर का साथ छोड़ दे. एसे लोगों को चेतवानी देते हुए उन्होंने कहा धमकी भरे कॉल से उनके कार्यकर्ता डरने वाले नहीं है. आखिर में उन्होने कहा उनकरे लिए राज्य का विकास हमेशा प्रथामिकता पर रहा है और हार के बाद भी उनका संधर्ष जारी रहेगा

