परसुडीह में भागवत कथा का तीसरा दिन
जमशेदपुर। परसुडीह सोसाइटी काॅलोनी स्थित श्री शिव दुर्गा हनुमान मंदिर में में चल रही भागवत कथा सप्ताह के तीसरे दिन शुक्रवार को भगवान और भक्त की भक्ति का विस्तार से वर्णन करते हुए कथावाचक आचार्य प्रसन्न कुमार शास्त्री ने कहा कि भागवत कथा में ताली पीटने वाला व्यक्ति जीवन में कभी माथा नहीं पीटता है। भागवत कथा का श्रवण से मानव के भीतर का साधु जागृत होता है और ईश्वर प्राप्ति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। जैसे भी हो हमें सच्चे मन से भागवत कथा का श्रवण और भगवान की भक्ति करनी चाहिए। भगवान से किसी भी वस्तु को मांगने के लिए विनती नहीं करनी चाहिए। प्रभु सबके प्रति सदभाव रखते हैं। मामा कंस का भी भगवान ने उद्धार किया। कंस वास्तव में पूर्व जन्म में कालनेमी नाम का राक्षस था जिसका उद्धार ईश्वर के हाथ से होना था। शिशुपाल रोज गाली देता था उसका भी प्रभु ने उद्धार किया। कालांतर में शिशुपाल ने अनेक बार श्रीकृष्ण को अपमानित किया और उनको गाली दी, लेकिन श्रीकृष्ण ने उन्हें हर बार क्षमा कर दिया। श्रीकृष्ण ने शिशुपाल के 100 अपराधों को क्षमा करने का वचन दिया था। उन्होंने भावनात्मक शैली से कथा का भक्तों को रसपान कराते हुए आगे कहा कि गोपीयां प्रेम से कन्हैया को पुकारती हैं। प्रभु उनके घर में चोरी करने जाते हैं और मक्खन चोर कहलाते हैं। श्री कृष्ण जब वृन्दावन छोड़ कर जा रहे थे तभी गोपीयों ने उन से प्रार्थना की कि वे वृन्दावन छोड़ कर ना जाए। भगवत् प्रेम में मगन मीराबाई कहती हैं कि मेरे तो बस एक गिरधर गोपाल ही हैं, दूसरा कोई नहीं है। कन्हैया जब दूर चले जाते हैं तब उचक-उचककर कन्हैया को नाम लेकर पुकारती हैं और कहती हैं कि लल्ला गाय तुझे मारेगी। भागवत कथा में भजनों की धुनों पर श्रद्धालु झूमते रहे।




