परसुडीह में भागवत कथा का दूसरा दिन
जमशेदपुर। परसुडीह सोसाइटी काॅलोनी स्थित श्री शिव दुर्गा हनुमान मंदिर में में चल रही भागवत कथा सप्ताह के दूसरे दिन गुरूवार को राजा परीक्षित चरित्र का वर्णन किया गया। कथावाचक आचार्य प्रसन्न कुमार शास्त्री ने राजा परीक्षित जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि राजा परीक्षित ने राज्य को पाकर परिवार का त्याग कर दिया और इसके बाद राज्य का त्याग कर वन प्रस्थान कर गए। उन्होंने अपने जीवन के नैतिक मूल्यों को समझकर प्रजा के हितों के लिए निर्णय लिए। उन्होंने कहा कि गलती करने के बाद क्षमा मांगना मनुष्य का गुण है, लेकिन जो दूसरे की गलती को बिना द्वेष के क्षमा कर दे, वो मनुष्य महात्मा होता है। आत्म शुद्धि, वंश शुद्धि, धन शुद्धि द्धारा भगवान अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। उन्होंने भावनात्मक शैली से कथा का भक्तों को रसपान कराते हुए आगे कहा कि वरदान के रूप में कंुती ने भगवान से दुःख मांगा, जो आज के समय में काफी अजीब लगता हैं। वह सुख किस काम का जिसमें लोग भगवान को भूल जाते हैं। भगवान मिलते हैं तो श्रद्धा और विश्वास से ही मिलते हैं। भगवान के पास दुःख नहीं हैं। भगवान सुख देने वाले हैं। विपरीत परिस्थिति आने पर भी परमात्मा को नहीं भूलना चाहिए। सारे धर्मो का सार श्रीमद भागवत महापुराण हैं। भागवत कथा में भजनों की धुनों पर श्रद्धालु झूमते रहे। भागवत कथा 19 फरवरी मंगलवार तक चलेगा।




