
जमशेदपुर


आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी का जन्म स्थल जमालपुर में विश्व स्तरीय धर्म महा सम्मेलन का आयोजन किया गया था क्रोना के बढ़ते कुप्रभाव के कारण यह तीन दिवसीय कार्यक्रम को जमालपुर में स्थगित कर इसे उसी तिथि पर ऑनलाइन कर दिया गया आज जमशेदपुर एवं उसके आसपास के लगभग 5000 से भी ज्यादा आनंद मार्गी घर बैठे ही तीन दिवसीय धर्म महासम्मेलन के प्रथम दिन के प्रवचन का मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभ लिए
आनंद मार्ग प्रचारक संघ के गुरु निवास मधु मंजूषा से ऑनलाइन धर्म महासम्मेलन के शुभारंभ में 19मार्च शुक्रवार को श्रद्धेय पुरोधा प्रमुख आचार्य विश्वदेवानंद अवधूत ने कहा कि कामनाओं के विसर्जन से ही परमाशांति का पथ प्रशस्त होता है। कामना ही आसक्ति का कारण है और आसक्ति ही दुख, व्यथा, कष्ट एवं पीड़ा का मूल है। इसलिए सजग कर्मयोगी कर्म के द्वारा परम पुरुष से संबंध स्थापित करते हैं ।ऐसे कर्म योगी के लिए ही शास्त्र में युक्त शब्द का प्रयोग किया गया है। जो कर्मयोगी फलआकांक्षा ,कर्मफल, कर्माभिमान त्याग कर, सब कुछ परम पुरुष के चरणों में अर्पित कर देता है ऐसे कर्म योगी को ही निष्काम कर्मयोगी की संज्ञा दी जाती है। निष्काम कर्मयोगी परा भक्ति के भाव में रत रहकर परम पुरुष का कर्म समझ कर निरंतर कार्य करते रहते हैं ऐसे साधक परमाशांति को प्राप्त करते हैं। मनुष्य को सदैव कर्म योग के लिए चेष्टाशील रहना चाहिए और यह सब संभव हो सकता है जब मनुष्य नैतिकता को आधार मानकर योग का अभ्यास करें।
ऑनलाइन धर्म सम्मेलन का लुफ्त विश्व के अनेक देशों में हजारों साधक लाभ उठा रहे हैं।

