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Home » आर वी एस इंजीनियरिंग काॅलेज की स्थापना के दस साल पूरे
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आर वी एस इंजीनियरिंग काॅलेज की स्थापना के दस साल पूरे

BJNN DeskBy BJNN DeskMay 22, 2014No Comments5 Mins Read
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एक दशक में आर वी एस ने देश को दिये 1,450 टेक्नोकै्रट्स
संवाददाता.जमशेदपुर 22 मईः

प्रदेश की युवा पीढ़ी को तकनीकी शिक्षा मुहैया कराने के कार्य में लम्बे समय से लगे स्थानीय आर वी एस काॅलेज आॅफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलाॅजी ने आज अपनी स्थापना के दस साल पूरे कर लिये। एक दशक के कामयाब सफर पर काॅलेज परिवार ने आज अपनी उपलब्धियों की विवेचना के साथ-साथ भविष्य की कार्य योजना की रूपरेखा भी तय की। विदित हो कि आर वी एस काॅलेज की स्थापना बाईस मई, 2004 को हुई थी। झारखंड राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने काॅलेज का उद्घाटन करते हुए उम्मीद जतायी थी कि प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में यह संस्थान एक मील का पत्थर साबित होगा और टेक्नीकल एजुकेशन के राष्ट्रीय मानचित्र पर झारखंड को स्थान दिलाने में महती भूमिका निभायेगा। आज बाईस मई को संस्थान की दसवीं सालगिरह पर संस्थान के निदेशक प्रो0 (डाॅ0) एम पी सिंह ने बताया कि अपनी स्थापना काल से अब तक काॅलेज से इंजीनियरिंग के चार वर्षीय बी0 टेक0 पाठय्क्रम के छह बैच पास आउट हो चुके हैं। इन छह बैच में कुल एक हजार चार सौ पचास छात्र-छात्राओं ने सफलतापूर्वक इंजीनियरिंग की डिग्री ली और इनमें से अधिकतर आज विभिन्न कंपनियों-संस्थानों में नौकरी पा चुके हैं। यही काॅलेज की सर्वाधिक उल्लेखनीय सफलता है। डाॅ0 सिंह ने बताया कि काॅलेज से पास आउट इंजीनियरिंग ग्रेजुएटस स्थानीय, निजी क्षेत्र एवं सार्वजनिक क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर साॅफ्टवेयर इंडस्ट्री में कार्यरत हैं। वहीं कुछ छात्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों में चुने जाने के बाद विदेश में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। निदेशक ने इस मौके पर काॅलेज के दस सालों की समग्र रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्हांेने बताया कि काॅलेज का प्रथम बैच 2004-2008 था जिसमें इंजीनियरिंग की चार प्रमुख शाखाओं केे कुल 265 विद्यार्थी उŸाीर्ण घोषित किये गये। इसी प्रकार बी0 टेक0 के 2005-2009 बैच में 230 विद्यार्थी, 2006-2010 बैच में 184 छात्र, 2007-2011 बैच में 197 विद्यार्थी, 2008-2012 बैच में 281 छात्र एवं 2009-2013 बैच में 258 छात्र-छात्राओं ने इंजीनियरिंग की डिग्री ली। डाॅ0 सिंह ने कहा कि संस्थान की प्रतिवर्ष बढ़ रही क्षमता के मद्देनजर यह आँकड़ा आने वाले वर्षों में ऊपर जायेगा।
इससे पहले संस्थान के चेयरमैन श्री बिन्दा सिंह ने आज काॅलेज प्रांगण में सालगिरह के मौके पर केक काटा और काॅलेज के सभी शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि काॅलेज प्रबंधन के साथ मिलकर सभी कर्मचारियों ने टीम भावना से संस्थान की सेवा की और इसी की बदौलत काॅलेज ने झारखंड प्रदेश में टेक्नीकल एजुकेशन के क्षेत्र में एक मुकाम हासिल किया। इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी माहौल के बावजूद आर वी एस संस्थान ने झारखंड में विशिष्ट पहचान बनायी है। चेयरमैन श्री सिंह ने कहा कि काॅलेज का फोकस हमेशा नौकरी-योग्य इंजीनियर्स तैयार करने पर रहा है। हर साल देश भर से बड़ी संख्या में इंजीनिरिंग ग्रेजुएटस निकलने के बावजूद इंडस्ट्री आज भी ‘एम्प्लाॅयेबल इंजीनियर्स‘ नामक उत्पाद की कमी महसूस करती है। आर वी एस संस्थान ने इसी बिंदु को अपनी कार्ययोजना में प्राथमिकता दी है। काॅलेज के एक-एक विद्यार्थी के लिए सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक ज्ञान के साथ-साथ औद्योगिक प्रशिक्षण सुनिश्चित कर बाजार की एम्प्लाॅयेबल इंजीनियर्स की माँग को संतुष्ट करना संस्थान ने अपना मुख्य लक्ष्य बनाया है। इंजीनियरिंग की मूल भावना के साथ पठन पाठन और नियमित अनुशासन ही संस्थान की पँूजी है और यही ताकत भी है। काॅलेज ने सन् 2004 में बी0 टेक0 इंजीनियरिंग की चार शाखाओं में कुल 240 छात्रों की क्षमता के साथ अपने अकादमिक सफर का शुभारम्भ किया था। वर्ष 2008 में ए आई सी टी ई ने इंलेक्ट्राॅनिक्स एण्ड कम्युनिकेशन तथा मेकैनिकल इंजीनियरिंग शाखाओं में सीटों की क्षमता साठ से बढ़ाकार 120-120 कर दी। पुनः संस्थान के संतोषजनक प्रदर्शन से प्रभावित होकर बी टेक की सी एस ई शाखा में सीटों की संख्या साठ से बढ़ाकर 120 करने की मंजूरी ए आई सी टी ई द्वारा दी गयी।
इससे पहले वर्ष 2007 में झारखंड के तत्कालीन राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी ने काॅलेज परिसर में छात्रावास का विधिवत् उद्घाटन किया था और काॅलेज की उम्दा व्यवस्था एवं बेहतरीन योजना से प्रभावित होकर झारखंड सरकार की ओर से दो लाख रू0 का अनुदान दिया था।
चेयरमैन ने काॅलज के इतिहास के पन्ने पलटते हुए बताया कि वर्ष 2009 में काॅलेज ने मास्टर डिग्री कोर्स कराने की दिशा में पहला कदम आगे बढ़ाते हुए तीन वर्षीय मास्टर आॅफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (एम सी ए) प्रोग्राम की शुरूआत की। वर्ष 2011 में कम्प्यूटर सांइस इंजीनियरिंग शाखा में एम0 टेक0 कोर्स की शुरूआत हुई। बाजार में माँग के अनुरूप वर्ष 2012 में बी0 टेक0 की दो नयी शाखाएँ- बी0 टेक0 (सिविल इंजीनियरिंग) एवं बी0 टेक (मेटेलर्जिकल इंजीनियरिंग) खोली गयीं। आज काॅलेज कुल छह इंजीनियरिंग शाखाओं के अलावा दो मास्टर डिग्री कोर्स समेत कुल 678 सीटों की क्षमता के साथ प्रदेश के युवाओं को समग्र एवं स्तरीय तकनीकी शिक्षा देने के काम में तत्परता से लगा है। अब तक छह पास आउट बैच में चार बार आर वी एस के छात्र विश्वविद्यालय के टाॅपर भी रहे हैं जिससे यह संकेत मिलता है कि संस्थान का अकादमिक स्तर श्रेष्ठ है। बैच 2004-2008 में वंदना शरण, 2005-2009 में दीपक कुमार वर्णवाल, 2007-2011 में सुमित कुमार सिंह और 2008-2012 में हरप्रीत सिंह यूनिवर्सिटी टाॅपर रहे।
संस्थान के कोषाध्यक्ष श्री शत्रुघ्न सिंह ने कहा कि संस्थान अब महज छात्रों की संख्यात्मक वृद्धि पर काम नहीं कर रहा, बल्कि छात्रों की गुणात्मक वृद्धि प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप भारत सरकार से एन बी ए सर्टिफिकेशन लेने की तैयारी इसी दिशा में एक अहम पड़ाव है।
इस मौके पर काॅलेज के प्राचार्य डाॅ0 सुकोमल घोष, सभी विभागध्यक्ष, फैकल्टी मेम्बर्स एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे। समारोह का संचालन काॅलेज के टेªनिंग एण्ड प्लेसमेंट प्रमुख एन रायचैधरी ने किया।

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आनंद किशोर बिहार झारखंड न्यूज़ नेटवर्क में कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। वे सामाजिक मुद्दों, जनहित और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी खबरों पर विशेष रुचि रखते हैं। आनंद का उद्देश्य कमजोर और जरूरतमंद लोगों की आवाज को सही मंच तक पहुंचाना है। वे निष्पक्ष, सरल और प्रभावशाली पत्रकारिता में विश्वास रखते हैं।

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