जामाडोबा । टाटा स्टील ने झरिया डिवीजन में 15 फरवरी को सस्टेनेबल माइनिंग के 100 साल का जश्न मनाया। इस कार्यक्रम में श्री टी वी नरेंद्रनए सीईओ ऐंड एमडीए टाटा स्टील ने बतौर मुख्य अतिथि हिस्सा लिया। श्री आनंद सेनए प्रेसिडेंटए टीक्यूएम ऐंड स्टील बिजनेसए श्री सुरेश दत्त त्रिपाठीए वीपीए;एचआरएमद्धएश्री चाणक्य चौधरीए वीपीए ;कॉर्पोरेट सर्विसेजद्ध और श्री अरुण मिश्राए वीपी ;रॉ मैटेरियल्सद्ध कार्यक्रम के अन्य सम्मानित अतिथि थे।
श्री संजय कुमार सिंहए जीएम ;कोलद्धए टाटा स्टील ने अतिथियों का स्वागत किया और कहाए श्यह दिन झरिया डिवीजन के लिए ही नहींए बल्कि झारखंड राज्य के लिए भी खास है। ये खदानें जमशेदपुर में स्टील बनाने की सुविधाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले कोयले की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं।श्
इस अवसर परए झरिया के पूर्व जीएम डॉ आर एन शर्माए श्री बी एस जब्बीए श्री पी एन सिंहए श्री आर एस सिंहए श्री चावला दिवाकर और श्री संजय रजोरिया को टाटा स्टील में उनके अमूल्य योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यूनियन के दो सबसे नेता श्री एस एस ज़मा ;क्षेत्रीय अध्यक्षए राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ.आरसीएमएसद्ध और श्री संतोष महतो ;क्षेत्रीय सचिवए आरसीएमएसद्ध को भी झरिया डिवीजन में उनके अथक और समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में श्री टी वी नरेंद्रन ने कहाए श्यह हम सभी के लिए गर्व का क्षण है। झरिया डिवीजन लचीलापन का एक प्रतीक हैए जो टाटा स्टील के बारे में इतना खास है। डिवीजन ने कई नवीन प्रोद्योगिकियों को लागू किया है और यह केवल डिवीजन के कर्मचारियों की लगन और प्रतिबद्धता के कारण संभव हुआ हैए जिन्होंने 100 वर्ष के सस्टेनेबल माइनिंग में अहम योगदान दिया है।श्
श्री अरुण मिश्रा ने झरिया में अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहाए श्समय के साथ झरिया प्रौद्योगिकी के मामले में काफी प्रगति की हैए लेकिन लागत एक चुनौती बनी हुई है। 100 साल का सफल समापन कालातीत कॉर्पोरेट मूल्यों का एक प्रमाण हैए जिसने एक पारिस्थितिकी तंत्र बनाया हैए जो आधुनिकए पर्यावरण के प्रति सजगए तकनीकी रूप से जागरूक है और भविष्य पर केंद्रित है।श्
इस अवसर पर पिछले 100 वर्षों की झरिया यात्रा पर एक लघु फिल्म भी प्रस्तुत की गई। दो पुस्तकें दृष्पिकएक्स टू कटिंग एजष् और ष्एन ओड टू झरिया. ट्रिब्यूट टू अ 100 ईयर लेगेसीष् भी इस अवसर पर लॉन्च की गईं। ये किताबें झरिया में 100 साल के टिकाऊ खनन की उल्लेखनीय कहानी है। पुस्तक में मूल्य निर्माणए परिवर्तन और सतत विकास की कहानियां एवं उन तमाम बहादुर पुरुषों और नेताओं की स्मृतियों को समेटा गया हैए जिन्होंने झरिया डिवीजन को भारतीय कोयला उद्योग में अग्रणी बनाया था।
मौके पर झरिया डिवीजन की 100 साल की कहानी को दर्शाने वाले हेरिटेज गैलरी का भी उद्घाटन किया गया।
1910 में भेलटांड़ कोलियरी के अधिग्रहण के साथ झरिया में खनन कार्य शुरू हुआए जबकि 1918 में जामाडोबा व सिजुआ समूहों की अन्य कोलियरियों को टाटा स्टील के दायरे में लाया गया। झरिया कोलियरीज की कहानीए कोल माइनिंग द्वारा न केवल टाटा स्टील के लिए कच्चे माल की सुरक्षा मेंए बल्कि कर्मचारियों के नवाचार की भावना में योगदान का प्रतिनिधित्व करती है।




