JAMTARA रिम्स जैसे सरकारी संस्थान में अगर इलाज के लिए हर कदम पैसे की डिमांड की जाने लगी तो गरीब गुरबो का इलाज कैसे होगा। यह एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। रिम्स कर्मियों पर पैसे मांगने का आरोप जामताड़ा के जितेन बाउड़ी ने लगाया है। जितेन पिछले 3 दिनों से अपनी जली हुई पत्नी का इलाज रिम्स में करवा रहा था। लेकिन बार-बार पैसे मांगे जाने की स्थिति में वह परेशान हो गया। खुद के खाने के पैसे नहीं थे तो वहां के स्टाफ को कहां से देता। नतीजा 80% से अधिक जली हुई पत्नी का इलाज कराना छोड़कर बिना डिस्चार्ज करवाए ही वापस जामताड़ा सदर अस्पताल ले आया है। जितेन की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि बेहतर इलाज करवा सकें और पत्नी की जान बचाने के लिए उसे एक तारणहार की जरूरत है जो उसका समुचित इलाज करवा सके ताकि उसकी जान बचाई जा सके।
VO: जामताड़ा थाना क्षेत्र के सहाना गांव की कल्पना बाउरी बीते रविवार 8 अगस्त की रात आग की चपेट में आने से बुरी तरह जल गई। घटना के बाद आनन-फानन में परिजनों ने देर रात को इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया यहां पर स्थिति को नाजुक देखते हुए धनबाद रेफर कर दिया गया। रविवार और सोमवार 2 दिन धनबाद पीएमसीएच में इलाज किया गया। स्थिति को नाजुक देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उसे वहां से रांची रिम्स रेफर कर दिया गया। रांची रिम्स में मंगलवार और बुधवार 2 दिन इलाज करने के बाद पैसे की किल्लत के कारण परिजन परेशान हो गए और गुरुवार को बिना डिस्चार्ज करवाएं मरीज को वापस जामताड़ा ले आया। वर्तमान में मरीज कल्पना बाउरी का इलाज सदर अस्पताल जामताड़ा में चल रहा है। वही मरीज के परिजन काफी गरीब होने के कारण उनका बेहतर से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। मरीज के पति जितेन बाउरी रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करता था। उसके दो छोटे बच्चे भी हैं और बूढ़े मां बाप की जिम्मेवारी भी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह बेहतर इलाज कराने में सक्षम नहीं है। महिला लगभग 80% जली हुई है। महिला की स्थिति को देखते हुए इन्हें बेहतर इलाज की जरूरत है जो कि इस परिवार के लिए नामुमकिन है। ऐसे परिवारों को सरकार की ओर से सुविधा उपलब्ध कराना चाहिए। जिससे किसी गरीब महिला की जान बच सके।
