
DEOGHAR: राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत देवघर सदर अस्पताल सभागार में जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) पर एक दिवसीय रिओरिएंटेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता सिविल सर्जन सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. रमेश कुमार ने की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस जानलेवा बीमारी से बचाव के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जाए।
इंसानों और पशुओं का साथ रहना बढ़ा रहा है खतरा
सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में तेजी से फैलता है जहां पशु, पक्षी और मानव एक साथ रहते हैं। इस बीमारी के वायरस को फैलाने में संक्रमित सूअर एम्पलिफाइंग होस्ट (मुख्य भूमिका) के रूप में कार्य करते हैं। यह एक बेहद खतरनाक वायरस जनित बीमारी है, जिसे आम बोलचाल में ‘मस्तिष्क ज्वर’ या ‘दिमागी बुखार’ भी कहा जाता है।
बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा: 30% मामलों में विकलांगता की आशंका
जिला भीबीडी पदाधिकारी डॉ. अभय कुमार यादव ने ट्रेनिंग के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए। उन्होंने बताया कि यह बीमारी 1 से 15 साल तक के बच्चों को सबसे ज्यादा अपनी चपेट में लेती है। हालांकि, यह बीमारी 250 संक्रमित लोगों में से किसी एक को ही गंभीर रूप से प्रभावित करती है, लेकिन जिन लोगों को यह होती है, उनमें से 30% मरीजों में शारीरिक या मानसिक विकलांगता आने का खतरा रहता है। वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, अब तक 50,000 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, जिनमें से 15,000 की मौत हो चुकी है।
‘मस्तिष्क ज्वर’ (JE/AES) के मुख्य लक्षण
चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. शब्दकांत मिश्रा ने पीपीटी (PPT) के माध्यम से बीमारी के लक्षणों की विस्तृत जानकारी दी:
तेज सिरदर्द और तेज बुखार होना।
शरीर में कंपन, उल्टी आना और बेहोशी छाना।
मिर्गी के दौरे पड़ना।
शारीरिक क्रियाओं के समन्वय (Coordination) में कमी आना।
अपील: ऐसे लक्षण दिखने पर मरीज को तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं, अन्यथा देरी होने पर मरीज की जान भी जा सकती है।
मादा क्यूलेक्स मच्छर से फैलता है यह वायरस
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जिला भीबीडी सलाहकार डॉ. गणेश कुमार यादव ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस को प्रसारित करने में ‘मादा क्यूलेक्स मच्छर’ मुख्य कारक है। उन्होंने इसके ब्रीडिंग ग्राउंड्स, नेचुरल होस्ट (प्रवासी पक्षी), और एक्सीडेंटल होस्ट (मनुष्य) के बारे में तकनीकी जानकारी दी। इस कार्यक्रम में आईडीएसपी के डॉ. मनीष शेखर, उपाधीक्षक डॉ. सुष्मा वर्मा सहित एमटीएस, एसआई, एएनएम और सहिया दीदी समेत कुल 54 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रोग्राम लीड अभिषेक कात्यायन भी इसमें शामिल हुए।
जिला प्रशासन ने अपील की है कि “मच्छर छोटी बीमारी नहीं, बड़ी आफत हैं।” स्वच्छता अपनाएं और देवघर को जेई मुक्त बनाएं।


