
झारखंड के देवघर जिले में युवाओं के हुनर को नई उड़ान मिल रही है। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी सौरभ कुमार भुवनिया के निर्देशानुसार श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के अंतर्गत झारखंड स्किल डेवलपमेंट मिशन सोसायटी (JSDMS) द्वारा संचालित मुख्यमंत्री सारथी योजना के तहत एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ लोकल सेल्फ गवर्नमेंट और सक्षम सेंटर कोलोसल स्किल्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से मेगा प्लेसमेंट ड्राइव चलाई गई, जिससे स्थानीय युवाओं के चेहरों पर खुशी की लहर दौड़ गई है।


बेंगलुरु की एथर एनर्जी में 35 प्रशिक्षित युवाओं का चयन
इस विशेष प्लेसमेंट ड्राइव में 35 प्रशिक्षित युवाओं को उनकी योग्यता के आधार पर रोजगार का सुनहरा अवसर मिला है। इन सभी युवाओं को बेंगलुरु की जानी-मानी कंपनी ‘एथर एनर्जी’ में असेंबलिंग ऑपरेटर के पद पर कार्य करने के लिए ऑफर लेटर सौंपे गए। इस चयन के बाद युवाओं में भारी उत्साह देखा गया, क्योंकि उन्हें सीधे संगठित क्षेत्र से जुड़ने और बड़े शहर में अपनी पहचान बनाने का मौका मिल रहा है।
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स्वरोजगार के लिए रीना देवी को मिली सिलाई मशीन
कौशल विकास कार्यक्रम का उद्देश्य न सिर्फ युवाओं को नौकरी दिलाना है, बल्कि उन्हें स्वरोजगार के लिए भी सक्षम बनाना है। इसी कड़ी में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकीं रीना देवी को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन की ओर से सिलाई मशीन प्रदान की गई। इस पहल से रीना देवी अब खुद का व्यवसाय शुरू कर समाज में एक मिसाल पेश कर सकेंगी और अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर पाएँगी।
शाही एक्सपोर्ट्स ने युवाओं को दिया करियर गाइडेंस
प्लेसमेंट ड्राइव में देश की प्रतिष्ठित कंपनी शाही एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने भी हिस्सा लिया। कंपनी के प्रतिनिधियों ने उपस्थित युवाओं को उपलब्ध रोजगार के अवसरों, चयन की बारीकियों, कार्यस्थल की संस्कृति (वर्क कल्चर) और भविष्य में करियर विकास की संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद जिला कौशल पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार साह और यूएनडीपी के परियोजना सहायक प्रियव्रत मिश्रा ने युवाओं का मार्गदर्शन किया। अधिकारियों ने कहा कि कौशल सिर्फ सर्टिफिकेट तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह उज्ज्वल भविष्य का आधार है।
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सफल युवाओं ने साझा की अपनी सक्सेस स्टोरी
कार्यक्रम के दौरान सफल प्रशिक्षणार्थियों ने मंच से अपने अनुभव साझा किए। आयुष चौधरी ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान सीखे गए अनुशासन और समय प्रबंधन ने ही उन्हें आज इस मुकाम पर पहुँचाया है। वहीं, वर्तमान में आदिशक्ति हॉस्पिटल में फ्रंट ऑफिस मैनेजर के रूप में कार्यरत अन्नू कुमारी ने अपनी सफलता की कहानी सुनाते हुए बताया कि कैसे इस सरकारी कौशल प्रशिक्षण ने उनकी जिंदगी को बदल दिया।



