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Home » Confederation Of All India Traders:कैट ने फुटवियर पर 5% जीएसटी और बीआईएस मानकों में संशोधन का आग्रह किया
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Confederation Of All India Traders:कैट ने फुटवियर पर 5% जीएसटी और बीआईएस मानकों में संशोधन का आग्रह किया

BJNN DeskBy BJNN DeskApril 7, 2022No Comments4 Mins Read
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जमशेदपुर।

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने आज केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से आग्रह किया है की 31 दिसंबर से पूर्व के अनुसार 1000 रुपये से काम कीमत वाले फुटवियर पर जीएसटी कर दर 5 % ही रखी जाए तथा उससे ऊपर की कीमत वाले फुटवियर पर कर दर 12 % रखी जाए वहीं दूसरी ओर दोनों कैट एवं आईएफए ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल से भी आग्रह किया कि वे 1000 रुपये से ऊपर के फुटवियर पर ही बीआईएस स्टैंडर्ड को लागू करें। अपने इस आग्रह पर दोनों संगठनों ने तर्क दिया कि देश की लगभग 85% आबादी 1000 रुपये से कम कीमत के फुटवियर इस्तेमाल करती है और इसलिए जीएसटी कर की दर में कोई भी वृद्धि की मार सीधे देश के 85 % लोगों पर पड़ेगी और चूंकि 90% फुटवियर का उत्पादन बड़े पैमाने पर छोटे और गरीब लोगों द्वारा किया जाता है या घर में चल रहे उद्योग एवं कुटीर उद्योग में किया जाता है ,इस वजह से भारत में फुटवियर निर्माण के बड़े हिस्से पर बीआईएस मानकों का पालन करना बेहद मुश्किल काम है ! इस संबंध में कैट ने वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के अलावा सभी राज्यों के वित्त मंत्रियों को फुटवियर पर 5% जीएसटी टैक्स स्लैब रखने के लिए अपने ज्ञापन भेजे हैं । ये दोनों कदम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया आह्वान को सशक्त बनाएंगे।

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर निर्माता है। पूरे भारत में फैली दस हजार से अधिक निर्माण इकाइयां और लगभग 1.5 लाख फुटवियर व्यापारी 30 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दे रहे हैं जिनमें ज्यादातर फुटवियर बेहद सस्ते और पैरों की सुरक्षा के लिए बनाए जाते हैं ! मकान और कपडे की तरह फुटवियर भी एक आवश्यक वस्तु है जिसके बिना कोई घर से बाहर नहीं निकल सकता है इसमें बड़ी आबादी घर में काम करने वाली महिलाएं, मजदूर, छात्र एवं आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न वर्ग के लोग हैं ! देश की 60 % आबादी 30 रुपये से 250 रुपये की कीमत के फुटवियर पहनती है वहीं लगभग 15% आबादी रुपये 250 से रुपये 500 की कीमत के फुटवियर का इस्तेमाल करती और 10% लोग 500 रुपये से 1000 रुपये तक के जूते का उपयोग करते हैं। शेष 15% लोग बड़ी फुटवियर कंपनियों अथवा आयातित ब्रांडों द्वारा निर्मित अच्छी गुणवत्ता वाली चप्पल, सैंडल या जूते खरीदते हैं।

कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री प्रवीन खंडेलवाल और राष्ट्रीय सचिव सुरेश सोन्थालिया ने आज कहा कि जीएसटी कर स्लैब में 5% की वृद्धि भारत के फुटवियर उद्योग और व्यापार के लिए प्रतिकूल साबित होगी। 7% की इस तरह की वृद्धि देश में जूते की खपत देश के 85 % आम लोगों पर सीधे रूप से पड़ेगा जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के गरीब तबके को आसान आजीविका प्रदान करने के संकल्प के खिलाफ होगा ! क्योंकि फुटवियर में बड़ी संख्यां में छोटे व्यापारियों ने कंपोजिशन स्कीम का विकल्प चुना है इसलिए वे इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं ले पाएंगे और इस तरह फुटवियर की कीमत में 7% का टैक्स और जुड़ जाएगा ! फुटवियर पर कर की दर बढ़ाने का मकसद उल्टे कर ढांचे को हटाना था तथा उपरोक्त आंकड़ों से पता चलता है कि इसका लाभ केवल 15 % बड़े निर्माताओं और आयातित ब्रांडों को ही होगा जबकि शेष 85% फुटवियर से संबंधित व्यापारी एवं निर्माता पर यह अतिरिक्त भार साबित होगा ! इसलिए कैट ने आग्रह किया है की फुटवियर पर 5% से अधिक जीएसटी कर की दर नहीं लगाई जानी चाहिए।
कैट ने कहा कि भारत में फुटवियर के निर्माण में क्योंकि 85% निर्माता बहुत छोटे पैमाने पर निर्माण करते हैं एवं निर्माण की बुनियादी जरूरतों से भी महरूम हैं इसलिए उनके द्वारा सरकार द्वारा फुटवियर के लिए निर्धारित बीआईएस मानकों का पालन करना असंभव होगा। साधू संतों की खड़ाऊं,पंडितों द्वारा उपयोग की जाने वाली निम्न गुणवत्ता वाली चप्पल, मजदूरों द्वारा पहने जाने वाले रबड़ और प्लास्टिक के निम्न गुणवत्ता वाले फुटवियर पर क्या बीआईएस मानकों का पालन संभव है, इस पर विचार करना बहुत जरूरी है ! इन मानकों का पालन केवल बड़े स्थापित निर्माताओं या आयातित ब्रांडों द्वारा ही किया जा सकता है ! भारत विविधताओं का देश है जहां गरीब तबके, निम्न या मध्यम वर्ग, उच्च मध्यम वर्ग और उच्च वर्ग के लोगों के विभिन्न वर्ग अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार विभिन्न प्रकार के फुटवियर पहनते हैं, ऐसी परिस्थितियों में केवल एक लाठी से सबको हांकना फुटवियर उद्योग के साथ बड़ा अन्याय होगा ! इसलिए केवल रुपये 1000 से अधिक की कीमत पर ही बीआईएस के मानक लागू होने चाहिए !

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