
चाईबासा।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नोवामुंडी लौह अयस्क खदान (टाटा स्टील) प्रबंधन ने पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सतत खनन और सुरक्षित पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करते हुए खदान परिसर में एक व्यापक वृक्षारोपण और जन-जागरूकता कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य खनन क्षेत्रों में हरियाली को बढ़ावा देना और प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करना है।
मुख्य अतिथि योहान येजेरला ने किया शुभारंभ
इस विशेष कार्यक्रम में चाईबासा क्षेत्र के खान सुरक्षा निदेशक (DGMS) योहान येजेरला ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने अपने हाथों से आम का पौधा लगाकर इस महाभियान की शुरुआत की। अपने संबोधन में योहान येजेरला ने जलवायु परिवर्तन से निपटने, प्रकृति को बचाने और सतत विकास (Sustainable Development) के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने DGMS के 125वें स्थापना दिवस के अवसर पर ली गई पर्यावरण संरक्षण की राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बारे में भी उपस्थित लोगों को विस्तार से बताया और उन्हें जागरूक किया।
1,720 पौधे और विशेष फलोद्यान का निर्माण
वृक्षारोपण का यह विशाल कार्यक्रम नोवामुंडी खदान के हिल-6 वेस्ट डंप क्षेत्र में आयोजित किया गया। इसके तहत पूरे खदान पट्टा क्षेत्र में कुल 1,720 पौधे रोपे गए। इन पौधों में मुख्य रूप से स्थानीय और फलदार प्रजातियां शामिल थीं, जिनमें आम, जामुन, अमरूद, अर्जुन, करंज, नीम और नींबू के पौधे प्रमुख हैं। पर्यावरण को हरा-भरा बनाने और स्थानीय जैव विविधता को संरक्षित करने के उद्देश्य से खदान क्षेत्र में विशेष रूप से ‘साल प्लांटेशन प्लॉट’ और ‘फलोद्यान’ (फ्रूट ऑर्चर्ड) विकसित किए जा रहे हैं, जो आने वाले समय में इस क्षेत्र की आबोहवा को पूरी तरह बदल देंगे।
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टाटा स्टील के अधिकारी और कर्मचारी रहे मौजूद
इस पर्यावरण संरक्षण पहल को सफल बनाने में खदान प्रबंधन और टाटा स्टील के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। वृक्षारोपण कार्यक्रम में माइन मैनेजर नितेश माहेश्वरी, हेड इक्विपमेंट ए जे जॉर्ज, प्रोडक्शन मैनेजर निरंजन जेना, सहायक प्रबंधक दुर्वा तेंदुलकर और पर्यावरण अभियंता हर्ष मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इनके अलावा माइन फोरमैन, माइनिंग मेट्स, एचईएमएम ऑपरेटर, विभिन्न विभागों के कर्मचारियों तथा संविदा कर्मियों ने भी बढ़-चढ़कर पौधे लगाए और प्रकृति संरक्षण का सामूहिक संकल्प लिया।



