
चाईबासा ।जहाँ एक तरफ़ देश में आयुर्वेद और एलोपैथ के बीच विवाद का दौर जारी है वहीं दूसरी तरफ होम्योपैथी ने चुपचाप कोरोना और ब्लैक फंगस के मरीजों को ठीक करने में सफलता प्राप्त की है ।आगरा के नेमिनाथ होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीज इस बात की स्पष्ट गवाही दे रहे हैं कि यहां भर्ती हुए अधिकतर कोविड के मरीज ठीक होकर वापस घर पहुंच गए और वर्तमान में ब्लैक फंगस के गंभीर स्थिति के मरीज अब ठीक हालत में है जो ब्लैक फंगस के मरीज थे वह पूर्व में करोना संक्रमित थे और उपचार के दौरान स्टेरॉयड और ऑक्सीजन का उपयोग प्रचुर मात्रा में कर चुके है।
आगरा में स्थित नेमिनाथ होमियोपैथी कॉलेज देश का प्रथम होमियो हॉस्पिटल है जिसे एन.ए.बी.एच. ने मान्यता दी हुई है।कोविड की दूसरी लहर में इस हॉस्पिटल में कुल अप्रैल और मई में 258 कोविड के मरीज भर्ती किये गए जिसमें से 222 मरीज होमियोपैथिक दवाईयों से पूर्ण स्वस्थ होकर अपने घर वापस जा चुके है।22 मरीजो का अभी उपचार चल रहा है।
नेमिनाथ होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ प्रदीप कुमार गुप्ता (एम.डी.होमियोपैथ) ने बताया की कोविड की पहली लहर में भी उन्होंने अपने मेडिकल कॉलेज में आईसीएमआर की स्वीकृति के पश्चात एफ एच मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में भर्ती कोविड-19 के मरीजों का परीक्षण किया था।जिसमें यह पाया था कि होम्योपैथिक दवा कोरोना के उपचार में अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई है और रिसर्च के दौरान सभी रोगी दो-तीन दिन में कोविड रोग के लक्षणों से मुक्त हो गए थे और उनकी आरटी पीसीआर टेस्ट रिपोर्ट भी 5 से 7 दिन में पॉजिटिव आ गयी थी।इस बार भी जितने भी कोविड के मरीज हॉस्पिटल में उपचार के दौरान आए सब का पूर्ण इलाज होम्योपैथिक दवाइयों से ही किया गया जिसमें ज्यादातर सभी कोरोना नेगेटिव होकर स्वस्थ हो चुके हैं अभी कुछ मरीजों का इलाज चल रहा है।किसी को भी पोस्ट कोविड कोई समस्या भी नही है। वर्तमान में ब्लैक फंगस महामारी से जूझ रहे दो लोगों का भी इलाज किया जा रहा है जिनको की एक-दो दिन के उपचार में ही बहुत लाभ पहुंचा है।होम्योपैथी में पहले से ही फंगस का इलाज है। इस कारण ब्लैक फंगस जैसी बीमारी को लेकर किसी भी परेशान या चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। 37 वर्षों से अधिक अनुभवी होमियोपैथिक डॉक्टर प्रदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि तीसरी लहर में बच्चे बहुत अधिक संख्या में प्रभावित होंगे यह कहकर समाज में डर फैलाना ठीक नहीं है।होम्योपैथिक चिकित्सक करोना की किसी भी लहर से सामना करने के लिए तैयार है ।पहली और दूसरी लहर में यह सिद्ध हो चुका है इस कारण तीसरी लहर जैसी किसी भी चर्चा से घबराने की आवश्यकता नहीं है ।हमने अपने मेडिकल कॉलेज में करोना से बचाव की दवाई बनाई है जिसका की निशुल्क वितरण हम लोग कर रहे हैं ।यहां एक चीज और महत्वपूर्ण है कि नेमिनाथ मेडिकल कॉलेज के सभी डॉक्टर बिना मास्क और बिना पीपी किट पहने मरीजों का उपचार करते हैं जिससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि होम्योपैथिक दवा कितनी कारगर है।इससे मरीज के मन मे भी उपचार के प्रति विश्वास मजबूत होता है।अब तो इतने कोरोना संक्रमित रोगों के इलाज के बाद यह भ्रम भी टूट गया की होम्योपैथिक दवा तत्काल असर नहीं करती है।



