

मिसेज केएमपीएम इंटर college का पहला दिन।यहां दाखिला और पढ़ना बहुत सम्मानजनक बात हुआ करती थी।1993की बात है तब मैंने मैट्रिक में टिस्को स्कूलों के बीच तीसरे topper होने का गौरव प्राप्त किया था और अखबारों में फोटो छपने पर मशहूर भी हो गई थी।लेकिन बाल मन भीतर से रैंगिंग की भयावहता की कल्पना से सिहर रहा था।उस ज़माने में देश में रैगिंग को कंट्रोल करने को लेकर कोई सक्रियता दिखती नहीं थी ऐसे में हमारे जैसे नाबालिग किशोर अखबार पढ़ पढ़ कर डरते रहते थे।तो मैं मिसेज केएमपीएम इंटर college के पहले दिन की बात कर रही थी।क्लास खचाखच भरा हुआ था और हम सब डरे हुए थे।मैं M1में थी यानि गणित।biology वाले Bसेक्शन, आर्टस लाले Aसेक्शन , commerce वाले सी सेक्शन, कुछ ऐसे बंटा था हमारा केएमपीएम।मैट्रिक के बाद प्लस टू में दाखिले के बाद पहले दिन हम सबकी धड़कनें बढ़ी हुई थी।अचानक सीनियर्स क्लास में प्रवेश किए , हम सबकी घबराहट चरम पर थी।इतने में एक सीनियर ने मुझे खड़े होने को कहा और बोले-metric topper, अच्छा बताओ 1/0 कितना , मैंने कहा–इनफिनिटी, वे बोले -वाह, अब बताओ 0/1तो मैंने कहा-0 , इसी बीच मेरे पापा के बड़े भाई समान अंकल के बेटे वहां आ धमके जो सीनियर थे, उनको देखते ही मेरी जान में जान आई।उन्होंने सीधे आकर मुझे बैठने को कहा और उनकी धाक ऐसी थी कि ये प्यारी सी और पढ़ाई से भरी रैंगिंग वहीं समाप्त हो गई।सबने राहत की सांस ली।


मिसेज केएमपीएम इंटर college का अनुशासन देखिए कि रैंगिंग हो भी रही थी तो वह कितना स्टैंर्डड थी।उसके मानक और पैरामीटर कितने “हाई लेवल”थे।आज नामी गिरामी अंग्रेजी माध्यम के स्कूल भी उस अनुशासन का अनुभव नहीं करा पाते जो हमने अपने अपने स्कूली जीवन में टिस्को स्कूल और इंटर के समय मिसेज केएमपीएम इंटर college में देखा और महसूस किया। पहले प्रिंसीपल मणि सर और फिर आजाद सर के नेतृत्व में हमारे इस इंटर college ने अनुशासन के नए आयाम स्थापित किए। शिक्षकों की तो बात ही निराली थी।जगहें कम पड़ जाएंगी अगर सबके बारे में लिखना शुरू करूं, चाहे साईंस के एस एस तिवारी सर हों, मंजर हुसैन सर हों, मंगलमूर्ति सर हों, नलिन सर हों या अन्य लोग, चाहे अंग्रेजी पढ़ाने वाली सोमा मैम हों इन सबकी यादें जेहन में हैं।इस बेहतर वातावरण में बेहतर शिक्षा ग्रहण करते हुए कैसे दो साल बीत गए पता नहीं चला। वो हमेशा ब्लू हाऊस का जीतना, वो एसेंबली में प्रतिज्ञा करना, college में और college से बाहर विभिन्न वाद विवाद प्रतियोगिताओं में college का डंका बजवाना ये हम सभी छात्रों का अहम उद्देश्य होता था।हां गरमनाला एरिया वर्सेस अदर एरिया के दबदबे की लड़ाई भी होती थी और तब कड़क प्रिंसिपल के माध्यम से लड़कों का उपाय भी होता था। खूबसूरत यादों के साथ हम सब साथी बेहतर करियर की आस लिए अपनी अपनी राह पकड़ लिए।मैंने आगे चलकर पत्रकारिता की राह पकड़ ली और अपने शहर वापस आने का 2006में मौका मिला. मैं ईटीवी में कार्यरत थी और मेरा जमशेदपुर ट्रांसफर हुआ था.काम और जीवन की आपाधापी में कई बातें लोग भूल जाया करते हैं।मैं भी भाग दौड़ में जब बिष्टुपुर स्थित मिसेज केएमपीएम इंटर college के बगल से गुजरती तो अद्भुद एहसास होता।एक आध बार कुछ न्यूज कवरेज का भी मौका मिला, लेकिन क ई चेहरे अब नए दिखते थे।इसी बीच पत्रकार और एक स्थानीय चैनल के निदेशक प्रशांत जी से लगातार मुलाकात हुई।अक्सर प्रेसवार्ता या अन्य जगहों पर भेंट होती और औपचारिक बातें होतीं।एक दिन प्रशांत ने कह दिया–हद करती हो यार, पहचानती भी नहींं, मैं पुतुल। M1.KMPM.अब अवाक होने की बारी मेरी थी, लेकिन मेरी भी क्या गलती।मेरी तो हाईट वही रह गई और चेहरा भी खास नहीं बदला लेकिन प्रशांत उर्फ पुतुल की मूछें थी जिस वजह से मैं पहचान नहीं पाई।हमलोग खूब हंसे।पुतुल ने पायलट की ट्रेनिंग ली थी और अपनी अच्छी खासी job को छोड़कर अपने फैमिली बिजनेस को संभालने जमशेदपुर आ गया था।प्रशांत के बाद आनंद से भेंट हुई जो प्रभात खबर में सीनियर रिपोर्टर है।सब मुझे पहचान लेते और मुझे सबको पहचानने में दिक्कत होती।लेकिन प्रशांत उर्फ पुतुल एक ऐसा पुल है जो लगातार दोनों छोर पर खड़े मित्रों को मिलाता रहता है।प्रशांत ने केएमपीएम का एक बड़ा वाट्सएप ग्रुप बनाया है जिसमें विभा, ज्योति, मुकुंद, कृष्णा, संतोष पांडेय और अनगिनत जुड़ चुके हैं और एक दूसरे से संपर्क में रहते हैं।M1 के क्लासमेट संतोष पांडेय उर्फ लंबू से 2007मार्च में सालों बाद न्यूज कवरेज के दौरान टीएमएच में मुलाकात हुई।संतोष टाटा स्टील में कार्यरत होने के साथ साथ यूनियन नेता भी हैं।केएमपीएम के वाट्सएप ग्रुप में एक बड़ी तादाद ऐसे मित्रों की हैं जो विदेश में बढ़िया नौकरी कर रहे हैं।
ये सब इसलिए बता रही ह़ूं कि जिस संस्थान ने हमें वो बनाया जो हम हैं आज वह संस्थान रहा ही नहीं।आज इंटर college की जगह खानापूर्ति के लिए वोकेशनल college बना दिया गया है।मेरे जमशेदपुर आने के दो साल के भीतर 2008से मिसेज के एमपीएम इंटर college को मैंने वोकेशनल college बनते देख लिया जो जुस्को की ओर से संचालित है।हालांकि यहां बीबीए, बीसीए, बीएससी(आईटी), बीएससी (पर्यावरण व जल प्रबंधन), बीएससी(मैथ्स) और बीएससी(रसायन) की पढ़ाई होती है जिसे कोल्हान विश्वविद्यालय से मान्यता मिली है, लेकिन ये भी सच है कि इस इंटर college के बंद होने के बाद ऐसा बेहतरीन इंटर college फिर अस्तित्व में नहीं आया।
हम टाटा स्टील से मांग करते हैं कि हमारे मिसेज के एमपीएम इंटर college को हमें वापस कर दो।मिसेज के एमपीएम इंटर college महज एक बिल्डिंग न थी एक अद्भुत और बेहतरीन शैक्षणिक माहौल से भरा एक ऐसा महल था जहां हम पल्लवित पुष्पित होकर हम वो बन पाए जो हम आज हैं।
#हमारे के एम पीएम को वापस लाओ
वर्तमान मिसेज के एम पीएम वोकेशनल college और पुराने मिसेज के एमपीएम इंटर college के बारे में—–मिसेज केएमपीएम यानि मिसेज कियोके मोनरो पेरिन मेमोरियल स्कूल की स्थापना 1915में हुई थी जो जमशेदपुर में स्थापित होने वाला पहला स्कूल था।स्कूल का नामकरण चार्ल्स पेज पेरिन की पत्नी मिसेज कियोके मोनरो पेरिन के नाम पर किया गया जिनकी दिलचस्पी शहर के बच्चों को बुनियादी शिक्षा देने की थी।आगे चलकर इसे इंटर college बनाया गया।पहले स्कूल और फिर इंटर college के रुप में ये मील का पत्थर साबित हुआ।इसकी लाल बिल्डिंग इसकी अहम पहचान है।अब ये वोकेशनल college है।

