
DGMS के 125वें स्थापना वर्ष पर बोकारो में पर्यावरण संरक्षण की गूंज
बोकारो, 09 जुलाई 2026: बोकारो जिले और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को एक नई दिशा देते हुए टाटा स्टील के वेस्ट बोकारो डिवीजन ने खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के 125वें स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में एक विशाल वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया है। इस खास पहल के जरिए क्षेत्र में सस्टेनेबल माइनिंग (Sustainable Mining) और ग्रीन कवर को बढ़ावा देने के लिए सर दोराबजी टाटा पार्क में 120 से अधिक फलदार पौधे रोपे गए। इन पौधों में मुख्य रूप से आम, अमरूद और बेल जैसी किस्में शामिल हैं, जो आने वाले समय में बोकारो क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगी।

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कार्यक्रम में जुटे DGMS और टाटा स्टील के दिग्गज अधिकारी
बोकारो के इस महत्वपूर्ण आयोजन में खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) के उप महानिदेशक श्याम सुंदर प्रसाद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ टाटा स्टील के जनरल मैनेजर (कोल) संजय राजोरिया और वेस्ट बोकारो के जनरल मैनेजर (डेज़िग्नेट) मुकेश रंजन भी प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
सुरक्षा और माइनिंग सेक्टर के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस ग्रीन ड्राइव में हिस्सा लिया। इनमें निदेशक (माइनिंग) अजीत कुमार, निदेशक (मैकेनिकल) नरेश गोविंद फुले, उप निदेशक (माइनिंग) परवेज आलम, उप निदेशक (इलेक्ट्रिकल) शेख मिन्हाजुद्दीन और उप निदेशक (मैकेनिकल) द्यामप्पा अडनूर शामिल थे। सभी अधिकारियों ने बोकारो और आसपास के खनन क्षेत्रों को सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने का संकल्प लिया।
बोकारो क्षेत्र में पहली बार ‘हाइड्रोसीडिंग तकनीक’ का शंखनाद
इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण अत्याधुनिक हाइड्रोसीडिंग मशीन (Hydroseeding Machine) का उद्घाटन रहा, जिसे मुख्य अतिथि श्याम सुंदर प्रसाद ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। टाटा स्टील के इस डिवीजन के इतिहास में यह पहली बार है जब माइनिंग के कारण प्रभावित हुई ढलानों को हरा-भरा करने के लिए इस वैज्ञानिक तकनीक को अपनाया जा रहा है।
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इस अवसर पर टाटा स्टील के वरिष्ठ अधिकारी चीफ (इंजीनियरिंग एवं प्रोजेक्ट्स) मज़हर अली और चीफ (कोल बेनिफिशिएशन) आशुतोष कुमार पांडेय सहित विभिन्न विभागों के प्रमुखों की मौजूदगी में इस मशीन का लाइव डेमो भी किया गया।
क्या है हाइड्रोसीडिंग तकनीक और बोकारो को इससे क्या होगा फायदा?
हाइड्रोसीडिंग (Hydroseeding) खनन प्रभावित और क्षतिग्रस्त क्षेत्रों, विशेषकर खड़ी ढलानों, ओवरबर्डन डंप (OB Dump) और अस्थिर जमीनों पर बहुत तेजी से हरियाली विकसित करने की एक विश्वस्तरीय आधुनिक तकनीक है।
काम करने की विधि: इसमें बीज, पानी, मल्च (Mulch), जैविक खाद और विशेष पोषक तत्वों का एक गाढ़ा घोल (Slurry) तैयार किया जाता है। इसके बाद हाई-प्रेशर नोजल वाली मशीन से इसे सीधे मिट्टी या डंप पर छिड़का जाता है।
तेज और समान अंकुरण: पारंपरिक रोपण की तुलना में इससे घास और पौधे बहुत तेजी से और एक समान रूप से उगते हैं।
मिट्टी के कटाव पर नियंत्रण: बोकारो के माइनिंग एरिया में भारी बारिश के दौरान होने वाले सॉइल इरोजन (Soil Erosion) को यह तकनीक प्रभावी रूप से रोकेगी।
दुर्गम पहाड़ियों पर हरियाली: जिन पथरीले और ऊंचे डंप्स पर इंसानों का जाना खतरनाक होता है, वहां इस मशीन की मदद से आसानी से दूर से ही छिड़काव किया जा सकता है।
टाटा स्टील का यह आधुनिक कदम न केवल बोकारो और वेस्ट बोकारो क्षेत्र में पारिस्थितिक पुनर्स्थापन (Ecological Restoration) को गति देगा, बल्कि यह पूरे झारखंड में सस्टेनेबल माइनिंग की दिशा में एक रोल मॉडल साबित होगा।



